जमीन से 660KM नीचे मिले हीरे एक नया खनिज 'डेवमॉयट' मिला है जिसको लेकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। इससे पहले इस खनिज को कभी नहीं खोजा गया था। यहां तीन बातें एकदम अलग सामने आई हैं। पहली- धरती के लोअर मैंटल से हीरे की खोज। दूसरा- हीरा नायाब और प्राचीन है। तीसरा- इसके अंदर दबा हुआ ऐसा खनिज मिला जो पहले कभी नहीं देखा गया। खास बात ये है कि इस लोअर मैंटल के पांच फीसदी हिस्से में यह नया खनिज पाया जाता है।

इस खनिज का नाम डेवमॉयट (Davemaoite) है। बोत्सवाना में मिले छोटे से हीरे के अंदर यह क्रिस्टल जैसा खनिज मिला है। इस खनिज के मिलने से वैज्ञानिकों को धरती की गहराई में नए रसायनों की जानकारी होगी। धरती की परतों को लेकर रहस्यों का खुलासा होगा। असल में यह हीरा बोत्सवाना के ओरापा स्थित एक हीरे की खदान की सबसे गहरी गुफा से निकला है। यह चार मिलिमीटर चौड़ा है। इसका वजन सिर्फ 81 मिलिग्राम्स है। इसके बारे में हाल ही में साइंस जर्नल में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।

इस हीरे को 1987 में एक डायमंड डीलर ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक को बेंच दिया था। यह वैज्ञानिक हीरे की स्टडी के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन न उस समय डीलर को इस हीरे की खासियत पता थी, न ही वैज्ञानिक को। अब यह हीरा कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स काउंटी में स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में रखा है। हाल ही में लास वेगास स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा के साइंटिस्ट ओलिवर शॉनर ने इसकी स्टडी की है।

असल में ओलिवर शॉनर दुनिया के सबसे गहरे हीरों की खोज में लगे थे। तब उन्हें इस हीरे के बारे में पता चला। ताकि वह धरती की गहराइयों की रसायनिक गणित को समझ सकें। आमतौर पर हीरे जमीन के नीचे 120 से 250 किलोमीटर की गहराई में बनते हैं। वहीं मिलते भी हैं। लेकिन यह प्राचीन और नायाब हीरा धरती के लोअर मैंटल से मिला है। यह परत जमीन से 660 किलोमीटर नीचे से शुरु होती है।