कोरोना वायरस से त्रस्त विश्व के लिए एक और बुरी खबर ने चिंता बढ़ा दी है। इस बार खबर अमरीका से आई है जहां जीवाणु (बैक्टीरिया) संक्रमण फैलने के बाद अलर्ट जारी किया गया है। पड़ोसी देश कनाड़ा तक में संक्रमण ने पैर पसार दिए हैं। अब तक 460 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। 

जानकारी के अनुसार संक्रमण सैल्मोनेला नामक बैक्टीरिया से फैल रहा है। अमरीका में 34 राज्यों के 400 लोग इस बैक्टीरिया से संक्रमित पाए गए हैं। वहीं कनाडा में भी 50 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। अमरीका की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने इसको लेकर अलर्ट जारी किया है। कनाड़ा में भी एकाएक संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ने के पीछे इसी बैक्टीरिया को कारण माना जा रहा है। कनाड़ा में 60 संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

मीडिया रिपोट्र्स में बताया गया कि अमरीका में प्याज से सैल्मोनेला बैक्टीरिया का संक्रमण फैला। अंतरराष्ट्रीय कंपनी ने इन लाल और पीले प्याजों की आपूर्ति की थी। इसके बाद सीडीसी ने प्याज न खाने का अलर्ट जारी किया है। जिनके घरों में पहले से ये प्याज हैं या फिर इससे खाना बनाया है, उसे फेंक देने की अपील की गई है। अमरीकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने भी माना कि सैल्मोनेला का संक्रमण मूलत: लाल प्याज से जुड़ा हुआ है। 19 जून से 11 जुलाई के बीच इसके शुरुआती मामले सामने आए थे। इसके बाद संक्रमण के मामले बढ़े।

साल्मोनेला पोइज़निंग नाम कई लोगों के लिए नया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, इससे संक्रमित लोगों में डायरिया, फीवर और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस बैक्टेरिया का अटैक 6 घंटे से 6 दिन बाद भी हो सकता है। इससे संक्रमित होने के बाद लोग 4 से 7 दिन तक बीमार रह सकते हैं। साथ ही अभी तक के आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि 5 से कम उम्र के बच्चों और 65 से बड़े  बुजुर्गों को ये आसानी से शिकार बना लेता है। ये संक्रमण आमतौर पर जानलेवा नहीं होता। 4 से 7 दिन के बाद मरीज ठीक होने लगता है। लेकिन अब सामने आ रहा है कि ये संक्रमण आँतों से होते हुए अगर सही इलाज के अभाव में दूसरे बॉडी पार्ट्स में फैला, तो दिक्कत हो सकती है। भारत में फिलहाल इसके मामले सामने नहीं आए हैं। लेकिन यहां प्याज को लगभग हर चीज में मिलाया जाता है। ऐसे यहां ये फैला तो इसका भयावह परिणाम हो सकता है। कोरोना के बीच दूसरी महामारी से लोगों की चिंता बढ़ गई है।