नेपाल चीन को छोड़कर एकबार फिर भारत के साथ दोस्ती कर ली है जिसके बाद ड्रैगन को बड़ा डर सता रहा है। भारत और अमेरिका का साथ पाकर पीएम केपी शर्मा ओली ने संसद को भंग करके ऐसा मास्‍टर स्‍ट्रोक चला जिसकी कल्‍पना भी चीन ने नहीं की थी। अब इस जोरदार पलटवार से घबराया चीन अपने उप मंत्री के नेतृत्‍व में आज चार चीनी नेताओं को आनन-फानन में नेपाल भेज रहा है।

चीन अब भारत-अमेरिका के करीब आए नेपाल को अपने हाथ से फिसलता देखकर नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के दोनों ही धड़ों के नेताओं पीएम ओली और पुष्‍प कमल दहल 'प्रचंड' को मनाने के लिए अंतिम प्रयास कर रहा है।
ओली के इस जोरदार झटके से सदमे में आया चीन अब चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के अंतरराष्ट्रीय विभाग के वाइस मिनिस्टर गुओ येझोऊ रविवार को यहां काठमांडू भेज रहा है। कहा जा रहा है कि नेपाल में सीपीएन-यूएमएल और माओवादी सेंटर को एक साथ लाने के लिए चीन ने ऐड़ीचोटी का जोर लगा दिया था। चीन के प्रयासों के फलस्‍वरूप नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का अस्तित्‍व आया।

अब ओली के कदम से नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी में टूट लगभग निश्चित हो गया, ऐसे में चीन की चिंता काफी बढ़ गई है और उसने दोनों ही धड़ों को एकजुट बनाए रखने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है।