चीन के प्रभाव में आकर अलग रास्ते पर निकले नेपाल के कदम लौटते दिख रहे हैं। नए नक्शे में भारत के इलाकों पर अपना अधिकार जताने के बाद अब वह बातचीत की मेज पर आने लगा है। उसने दिल्ली से कहा है कि वह विदेश सचिवों के बीच वर्चुअल मीटिंग को भी तैयार है। एक डिप्लोमेटिक नोट में नेपाल सरकार कहती है कि विदेश सचिव आमने-सामने या वर्चुअल मीटिंग में कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा के मसले पर बात कर सकते हैं।

पिछले महीने भारत ने कहा था कि कोरोना महामारी से निपटने के बाद विदेश सचिव हर्षवर्धन सिंगला और नेपाली समकक्ष शंकर दास बैरागी इस मामले पर बात करेंगे। विदेश सचिव स्तर की बातचीत का आइडिया 1997 में आया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल नेपाल गए थे। फिर 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी-जीपी कोईराला के बीच भी इस लेवल पर बातचीत हुई। पिछले साल नवंबर में नेपाल ने फिर इसकी पहल की थी, पर बातचीत हो नहीं सकी। अब कोरोना वायरस ने अनिश्चितता पैदा कर दी है, इसलिए नेपाल वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीटिंग करने को कह रहा है।

नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने पिछले महीने के आखिर में नए नक्शे को संसद में पेश किया था। इस नक्शे में नेपाल ने भारत के कुल 395 वर्ग किमी के इलाके को शामिल किया है। इसमें लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी के अलावा गुंजी, नाभी और कुटी गांवों को भी शामिल किया गया है। नेपाल-भारत और तिब्बत के ट्राई जंक्शन पर स्थित कालापानी करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भारत के मुताबिक, करीब 35 वर्ग किमी का यह इलाका उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है। नेपाल का कहना है कि यह इलाका उसके दारचुला जिले में आता है। भारत ने इसे पूरी तरह से एकपक्षीय फैसला बताया और साफ कर दिया था कि वे सभी इलाके भारत का हिस्सा हैं।

नेपाल के इस कदम से भारत के साथ उसके रिश्तों पर गहरा असर पड़ रहा है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि इस सीमा विवाद का हल बातचीत के माध्यम से निकालने के लिए आगे बढऩा होगा। इसके बाद नेपाल ने पिथौरागढ़ से सटे बॉर्डर पर बरसों पुराने एक रोड प्रोजेक्ट को शुरू करवा दिया। यह रोड रणनीतिक रूप से अहम है और उसी इलाके में है, जहां पर नेपाल अपना कब्जा बताता रहा है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जब लिपुलेख से कैलास मानसरोवर जाने वाले रास्ते का उद्घाटन किया, तभी नेपाल ने इसका विरोध किया था। उसके बाद 18 मई को नेपाल ने नया नक्शा जारी कर दिया। भारत ने साफ कहा था कि नेपाल को भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। नेपाल के नेतृत्व को ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जिससे बैठकर बात हो सके।