गाजियाबाद जिले के मुरादनगर में एक हिंदू चाय विक्रेता की इलाज नहीं मिलने के कारण सोमवार को मौत हो गई। रिश्तेदारों के नहीं पहुंचने पर कॉलोनी में ही रहने वाले मुस्लिम समाज के लोगों ने आगे बढ़कर उनका अंतिम संस्कार कराया। मुस्लिम समाज के लोगों की इस पहल की काफी प्रशंसा हो रही है।

रावली मार्ग स्थित चुंगी नंबर तीन निवासी 48 वर्षीय अशोक कश्यप परिवार के साथ रहता था। वह चुंगी नंबर तीन स्थित पुलिस चौकी के पास ठेली लगाकर चाय की दुकान करके परिवार का लालन पालन करता था। परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा अंशुल कश्यप है। कोरोना कर्फ्यू लगने के कारण अशोक घर में ही रहता था। दस दिन पहले उसे बुखार आ गया। परिजनों ने कॉलोनी में रहने वाले डॉक्टरों को उसे दिखाया। हालात में सुधार नहीं होने के कारण डॉक्टर ने मरीज को मोदीनगर या गाजियाबाद के किसी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी।

अंशुल कश्यप ने बताया कि काफी प्रयास करने के बाद भी अस्पताल में भर्ती नहीं करा सका। सोमवार सुबह अशोक कश्यप ने घर पर दम तोड़ दिया। अंशुल कश्यप ने पिता की निधन की सूचना कॉलोनी के लोगों व नजदीकी रिश्तेदारों को दी, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी कॉलोनी के लोग या रिश्तेदार नहीं पहुंचे। इस बीच सभासद जुनैद ने जब जाकर देखा तो शव के पास मां बेटा बैठे रो रहे थे। जब उनसे पूछा कि श्मशान घाट लेकर क्यों नहीं गए तो उन्होंने बताया कि कोई आया ही नहीं है तो कैसे लेकर जाएं। इसके बाद सभासद जुनैद ने मुस्लिम समाज के लोगों को बुलाया। 

राम नाम सत्य बोलते हुए श्मशान तक ले गए

मुस्लिम समाज के लोगों ने पहले अंतिम संस्कार करने के लिए लकड़ी व अन्य सामान का इंतजाम किया। इसके बाद इन्ही लोगों ने ही अर्थी को कंधा दिया और राम नाम सत्य बोलते हुए शव को श्मशान घाट तक ले गए। मुस्लिम समाज के लोगों की मौजूदगी में ही पुत्र अंशुल कश्यप ने शव को मुखाग्नि दी।