NEET रिजल्ट में NTA की बड़ी गलती सामने आई है जिसमें टॉपर को फेल बताया गया है। मृदुल रावत नाम के नीट उम्मीदवार को 329 अंक मिले. लेकिन नेशनलट टेस्टिंग एजेंसी (NTA ) की ओर से आंसर की और रिकॉर्डेड रिस्पोंसेबल शीट जारी से पता चला कि वो टॉपर हैं और 650 अंक मिले हैं।

एसटी कैटेगरी के टॉपर मृदुल रावत को NEET 2020 के रिजल्ट में पहले फेल बता दिया गया। इसके बाद जब आंसर की और रिकॉर्डेड रिस्पोंसेबल शीट चेक हुई तो मृदुल न सिर्फ पास हुए बल्कि वह एसटी कैटेगरी के टॉपर निकले। इसके बाद नीट के रिजल्ट को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

NEET परीक्षा का रिजल्ट 16 अक्टूबर को जारी किया गया था। इस परीक्षा में ओडि‍शा के रहने वाले शोएब ने पहली रैंक हासिल की है। वहीं मृदुल रावत एसटी कैटेगरी के टॉपर हैं, लेकिन उन्हें रिजल्ट में पहले फेल घोषित क‍र दिया गया था। परिणाम में इस तरह की खामी को लेकर मृदुल अचानक बहुत परेशान हो गए। उन्होंने खाना पीना भी छोड़ दिया था।

 
फिर रिजल्ट के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA ) की ओर से आंसर की और रिकॉर्डेड रिस्पोंसेबल शीट जारी हुई तो उसमें मृदुल को 650 अंक मिले थे। इन अंकों के हिसाब से वो ST कैटेगरी में ऑल इंडिया टॉपर हैं। एनटीए की इस खामी को लेकर लोग अब रिजल्ट पर सवाल उठा रहे हैं।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 16 अक्टूबर को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) 2020 के लिए रिजल्ट घोषित कर दिया। जो उम्मीदवार परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे, NEET की आधिकारिक वेबसाइट ntaneet.nic.in पर उनके परिणाम जारी किए गए।

NEET 2020 की परीक्षा 13 सितंबर, 2020 को आयोजित की गई थी। कोविड -19 महामारी और लॉकडाउन के विस्तार के कारण कई बार देरी हुई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष लगभग 13.66 लाख छात्र परीक्षा के लिए उपस्थित हुए। नीट परीक्षा के जरिये देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस में दाखि‍ला मिलता है।

इसमें ऑल इंडिया रैंकिंग के हिसाब से देश के टॉप मेडिकल संस्थानों में एडमिशन होता है। इस बार कोरोना के चलते कंटेनमेंट जोन के परीक्षा केंद्र भी निरस्त कर दि‍ए गए थे। स्वास्थ्य मंत्रालय की सभी गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए देश भर में ये परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के लिए देश भर के 15 लाख से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किया था. इस साल, NEET 2020 परीक्षा 3,800 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। परीक्षा में कुल उम्मीदवारों में से लगभग 90 प्रतिशत उपस्थित हुए थे।