विधानसभा अध्यक्ष हितेंद्रनाथ गोस्वामी ने राज्य के गरीब मुछाआरा परिवारों के लिए एक नीति लाने की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने इस मसले पर विमर्श करने की सदन को सलाह दी ताकि राज्य के अनुसूचित जाति के मुछआरे परिवारों के विकास के लिए सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा सके। विधानसभा के प्रश्नकाल में एआईयूडीएफ विधायक अनंत कुमार मालो के तारांकित सवालों को लेकर जारी चर्चा के दौरान अगप विधायक भवेन भराली ने कहा कि अनुसूचित जाति समुदाय के मछुआरों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है।

विधायक भराली ने सुझाव दिया कि मछली पालन एवं उत्पादन के लिए सरकारी जलाशयों को सीधे सेटलमेंट की व्यवस्था के जरिए उन्हें मदद देने की पहल की जानी चाहिए। इसके जवाब में मत्स्य पालन विभाग के मंत्री परिमल शुक्लवैद्य ने इसमें समस्या घटने के बजाय बढ़ने की ही संभावना अधिक रहने की बात कही क्योंकि, सरकारी तालाब व जलाशयों का टेंडर होता है और राजस्व देने वाले व्यक्ति को लीज पर देने का नियम है।


मंत्री के जवाब के बाद अध्यक्ष गोस्वामी ने राज्य के एससी समुदाय के मछुआरों के लिए नीति प्रस्तुत करने की जरूरत पर बल दिया। अगप विधायक रमेन कलिता, प्रदीप हजारिका और कांग्रेस विधायक कमलाक्ष्य दे पुरकायस्थ ने भी पूरक सवाल किए। इससे पहले विधायक मालो के तारांकित सवालों के लिखित जवाब में मंत्री शुक्लवैद्य ने बताया कि एससी जाति के मछुआरों के आर्थिक विकास के लिए मीन विभाग की ओर से केंद्र सरकार की सहायता प्राप्त दुर्घटनाजनित सामूहिक बीमा योजना, एससी समुदाय के मछुआरों के लिए नए तालाब की खुदाई और असली मछुआरों के रहने के लिए नील बिप्लब योजना के तहत मछुआरा आवास निर्माण योजना आदि शामिल हैं। जून, जुलाई और अगस्त महीने में मछली पकड़ने का काम बंद रहने के दौरान उन्हें एकमुश्त सहायता देने की भी भविष्य में योजना है।