पिछले दिनों श्रीलंका के समुद्री तट के पास एक मालवाहक जहाज आग लगने के बाद डूब गया था। अब उस जहाज से घातक रसायनों का स्त्राव हो रहा है, जिससे समुद्री जीवों की मौत का खतरा बढ़ गया है। जहाज के डूबने से पानी में ‘जहर’ घुल गया है। अब तक 100 से ज्यादा कछुए, एक दर्जन डॉल्फिन और एक ब्लू व्हेल समुद्र तट पर मृत मिले हैं। 

वहीं अनेक समुद्री जीवों के मारे जाने की आशंका पैदा हो गई है। पारिस्थितिकी विज्ञानियों का मानना है कि जलीय जीवों की मृत्यु का जहाज में आग लगने और उसमें से खतरनाक रसायनों के स्राव से सीधा संबंध है। सिंगापुर के झंडे वाले एक्सप्रेस पर्ल जहाज में 12 दिन तक आग लगी रही। यह पिछले हफ्ते कोलंबो के मुख्य बंदरगाह के पास डूब गया। हालांकि सरकारी अधिकारियों ने कहा कि जलीय जीवों से जुड़े इन कारणों की अस्थायी रूप से पुष्टि हुई है और पूरी तरह जांच अभी बाकी है।

जहाज पर 20 मई को आग गई थी। इसके कुछ दिन बाद मृत जलीय जीव समुद्र किनारे आने लगे। कछुआ संरक्षण परियोजना के तुषान कपूरुसिंघे ने भी कछुओं की मौत के पीछे जहाज पर आग लगने और रसायनों के स्राव को जिम्मेदार बताया है। श्रीलंका के समुद्र क्षेत्र में पांच प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं, जो अंडे सेने के लिए अक्सर तट के नजदीक आते हैं। मार्च से जून के बीच कछुए बड़ी संख्या में आते हैं। जानकारी के मुताबिक इस जहाज पर 1500 कंटेनर्स में से कम से कम 81 में ‘खतरनाक’ सामान था। श्रीलंका नौसेना का मानना है कि केमिकल कार्गो की वजह से ही जहाज में आग लगी। आग की वजह से अधिकतर रसायन खत्म हो गए, लेकिन उसका कचरा जिसमें फाइबरग्लास और कई टन प्लास्टिक ने समुद्र में बहुत ज्यादा प्रदूषण फैला दिया। देश के लोकप्रिय बीच पर इसका असर लंबे समय तक दिखता रहेगा।