कांग्रेस ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि वह सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम(अफस्पा) और अशांत क्षेत्र अधिनियम को लेकर दोहरे मापदंड अपना रही है। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति(एआईसीसी) की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा को 'पाखंडी और लज्जाविहीन' करार देते हुए कहा कि राजग सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों से स्वयं अफस्पा हटा लिया लेकिन इसकी समीक्षा किए जाने के संकल्प को लेकर कांग्रेस के घोषणापत्र की आलोचना की है।


पार्टी के घोषणापत्र को जारी करने के लिए यहां पहुंची सुश्री चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी दावा नहीं किया कि वह अफस्पा को हटायेगी , जैसा कि भाजपा आरोप लगा रही है , लेकिन यह जरुर कहा है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा करेगी तथा उसके बाद ही कोई निर्णय लेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने वाली भाजपा ने राज्य में अफस्पा हटाये जाने को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) से समझौता किया था।


एआईसीसी प्रवक्ता ने कहा कि पिछले पांच साल के दौरान देश में आतंकवादी गतिविधियों में 250 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे पहले देश के इतिहास में कभी नहीं हुआ कि एक प्रधानमंत्री बिन बुलाए शत्रु देश का दौरा करे और उनके साथ नाचे तथा बिरयानी खाये। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमला सबसे बड़ी खुफिया विफलता है।


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कारगिल युद्ध, ताबूत घोटाला और संसद पर हमले जैसी घटनायें हुई। उन्होंने भाजपा नीत सरकार का उपहास उड़ाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने आईएसआई प्रमुख के साथ बैंकाक में गुप्त बैठक की और अब भाजपा ही देशभक्ति का पाठ पढ़ा रही है।

यहां लागू है अफस्पा
1958 में इसे असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत में लागू किया गया। 1990 से अफस्पा जम्मू-कश्मीर में भी लगा दिया गया है ताकि हालात पर काबू पाया जा सके। हालांकि लद्दाख इससे बाहर है।


क्या है अफस्पा?
1958 में भारतीय संसद ने 'अफस्पा' यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट लागू किया था। इसे अशांति वाले इलाकों में लागू करते हैं। इस कानून को खासतौर पर पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बनाया गया था।


इरोम शर्मिला ने किया 16 साल अनशन
मणिपुर की सामाजिक कार्यकत्र्ता इरोम शर्मिला (irom Sharmila) ने 2000 से अफस्पा के खिलाफ अनशन शुरू किया था। 2016 में अफस्पा हटने के बाद 16 साल बाद अपना अनशन खत्म किया था। त्रिपुरा से भी अफस्पा हट चुका है।