नागरिकता (संशोधन) विधेयक को अपना समर्थन देते हुए वित्त मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने गुरुवार को कहा कि नक्सली और वामपंथी विधेयक के विरोध के लिए धमकी दे रहे हैं। सरमा ने ट्वीट किया, अच्छी तरह से जानते हैं कि नक्सली/वामपंथी रणनीति के तहत चरित्र हनन करते हैं और धमकी देते हैं। इससे असम में नागरिकता(संशोधन)विधेयक लागू करने के बारे में मेरे विचारों में बदलाव नहीं होगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, वे हमें एक विशेष सभ्यता का दास बनाना चाहते हैं। हालांकि इस सभ्यता की लड़ाई में हम जरूर जीतेंगे। असम और भारत अवश्य विजयी होगा। सरमा 6 जनवरी को उस वक्त विवादों में आ गए थे जब उन्होंने कहा था कि अगर नागरिकता संशोधन विधेयक पारित नहीं होता है तो असम जिन्ना के सिद्धांत के समक्ष समर्पण कर देगा और असमी लोगों को चुनने वाली 17 सीटें जिन्ना के मार्ग पर चली जाएगी। एक दिन बाद उन्होंने कहा कि अगर विधेयक पारित नहीं होता है तो पांच सालों में हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे और इससे उन तत्वों को लाभ होगा जो चाहते हैं कि असम दूसरा कश्मीर बन जाए।

आपको बता दें कि असम सहित पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में बिल का जबरदस्त विरोध हो रहा है। बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीडऩ के शिकार हिंदुओं, सिखों, पारसियों, जैनियों, बौद्धों और ईसाईयों को भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सका। कहा जा रहा है कि 31 जनवरी से शुरू होने जा रहे संसद के बजट सत्र के दौरान बिल राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। हालांकि ऊपरी सदन में बिल का पारित होना मुश्किल है क्योंकि राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है।

कांग्रेस ने राज्यसभा में बिल का विरोध करने का फैसला किया है। बिल का विरोध विपक्षी दल ही नहीं बल्कि भाजपा के सहयोगी दल भी कर रहे हैं। इनमें शिवसेना और जदयू शामिल है। असम गण परिषद ने तो बिल के विरोध में भाजपा से गठबंधन ही तोड़ दिया। उसके तीन मंत्री सर्वानंद सोनोवाल सरकार से इस्तीफा भी दे चुके हैं।