मेघालय के जयंतियां हिल्स में स्थित अवैध काेयला खदान में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए आॅपरेशन जारी है। नेवी पीआरआे कैप्टन पीके शर्मा ने कहा कि हमें बुधवार को पहली सफलता मिली है, लेकिन बाॅडी नहीं मिल पार्इ है। रेस्क्यू टीम लगातार खदान के अंदर पहुंचने का प्रयास कर रही है। यह रेस्क्यू आॅपरेशन तब तक चलेगा जब तक रूकने का आदेश नहीं मिलता।  


बता दें कि बुधवार की रात नौसेना के गाेताखारों को एक महीने के बाद खदान के अंदर मानव कंकाल दिखार्इ दिया है। यह कंकाल आरआेवी के माधयम से दिखार्इ दिया है। जानकारी के अनुसार कोयला खदानों के पानी में सल्फर की मात्रा बहुत अधिक होती है जो मानव शरीर को बहुत तेजी से गला सकता है।


नेवी पीआरआे कैप्टन पीके शर्मा ने कहा कि यह आॅपरेशन कितना मुश्किल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हमारे गोताखोर आरआेवी का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि जहां आप नहीं जा सकते हैं वहां आरआेवी जा सकता है। शर्मा ने बताया कि खदान के अंदर बहुत सी छोटी छोटी खदानें हैं आैर हमारे पास उनका कोर्इ मैप नहीं है। हमें नहीं पता है कि मजदूर कहां है? लेकिन बुधवार को एक कंकाल मिला है जिससे एक उम्मीद है कि वे (मजदूर) इस एरिया में हो सकते हैं।

सुरंग में भर गया था नदी का पानी


गौरतलब है कि 13 दिसंबर को 370 फीट गहरे कोयला खदान में नदी का पानी भर

जाने से सुरंग का रास्‍ता बंद हो गया था। तब से इसमें फंसे 15 खनिकों को

बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी। जनवरी में ही पूर्वी जयंतिया जिले में

एक और अवैध कोयला खदान में दो खनिकों के शव मिले थे। इस मामले में आठ

लोगों को गिरफ्तार किया गया था। नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने असुरक्षित खनन

पर 2014 से प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद अवैध खनन जारी है।