नवरात्रि के नौ दिनों में माता के अलग अलग रूप की पूजा होती है लेकिन छतरपुर के एक काली माता मंदिर में माता के तीन रूप के दर्शन वो भी एक दिन में पाकर माँ के भक्त धन्य हो रहे हैं। 

सुबह बाल्य अवस्था तो दोपहर को वयस्क और शाम को वृद्धावस्था में माँ को देखकर लोग अचंभित हैं. कलयुग में माँ के इस चमत्कार से अब यह मंदिर देश का इकलौता मंदिर है जो तीन रूपों वाली माता का मंदिर बन गया है। 

छतरपुर जिले के हमा गाँव में बना यह है काली देवी माता का मंदिर जहां पर विराजमान माँ काली देवी अपने भक्तों को तीन रूपों में दर्शन देती हैं।लोगो को तीन रूपों में दर्शन देने का यह सिलसला कोई नया नहीं बल्कि 300 सालों से चला आ रहा है. मंदिर के पुजारी का कहना है कि माता रानी कलकत्ता से आईं थीं और एक यज्ञ-हवन के दौरान कन्या रूप में प्रगट होकर मूर्ति में स्थापित हो गईं थीं। 

प्राचीन मंदिर की अनोखी नखासी और प्राकृतिक छटा के बीच बना यह मंदिर माता के दरवार को और भी भव्य बना देता है. वैसे तो हमेशा माँ के भक्त उनके बाल्य ,वयस्क और वृद्धावस्था के दर्शन करने के लिए देश के कोने कोने से आते हैं। 

नव रात्रि में माता का महत्व और ही बढ़ जाता है और यहाँ प्रति दिन सैकड़ो की संख्या में महिलाएं और पुरुष दर्शन करने के लिए आते हैं. लोगों की माने तो हमा की काली देवी माता सुबह बाल्य अवस्था में दोपहर को वयस्क और शाम को ब्रद्धा अवस्था में दर्शन देती हैं। 

जरुर नहीं कि सभी को माता तीन ही रूपों में नजर आएं. मान्यता है कि जिसने माँ के तीन रूप देखने चाहे उसे माँ ने अपने तीनो रूपों के दर्शन एक ही दिन में दिए। 


माता के इस चमत्कार से अब यहाँ पर दूर दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं. लोग यहाँ पर अपनी श्रद्धा के अनुसार माता की पूजा अर्चना कर परिवार के साथ पुन्य कमाते हैं।