देवी मां के चतुर्थ रूप का नाम है, देवी कूष्माण्डा । कूष्पाण्डा का संस्कृत में अर्थ होता है लौकी, कददू  । अब अगर आप किसी को मजाक में लौकी, कददू   पुकारेंगे तो वह बुरा मान जाएंगे और आपके प्रति क्रोधित होंगे । लोकि , कददू  गोलाकार है।  

अत: यहां  इसका अर्ध प्राणशक्ति से है - वह प्राणशक्ति जो पूर्ण, एक गोलाकार, वृत की भांति । भारतीय परंपरा के अनुसार लौकी, कहू का सेवन मात्र ब्राह्मण, महाज्ञानी ही करते थे । अन्य कोई भी वर्ग इसका सेवन नहीं करता था । लौकी, कद्दू आपकी प्राणशक्ति, बुद्धिमत्ता और  शक्ति को बढ़ाती है।

लौकी, कद्दू के गुण के बबारे में ऐसा कहा गया है, कि यह प्राणों को अपने अंदर सोखती है, और साथ ही प्राणों का प्रसार भी करती है । यह इस धरती पर सबसे अधिक प्राणवानऔर ऊर्जा प्रदान करने वाली शाक, सब्जी है । जिस प्रकार अश्वथ का वृक्ष 24 घंटे आँक्सीजन देता है उसी प्रकार लौकी, कद्दू ऊर्जा को ग्रहण कर अवशोषित कर उसका प्रसार करते है । 

सम्मूर्ण सृष्टि-प्रत्यक्ष व  अप्रत्यक्ष, अभिव्यक्त व अनभिव्यक्त - एक बडी गेंद, गोलाकार कद्दू के समान है । इसमें हर प्रकार को विविधता पाई जाती है छोटे से बड़े तक ।  कू का अर्थ है छोटा, 'म्' का अर्थ है उर्जा और "अंडा" का अर्थ है ब्रह्मांडीय गोला - सृष्टि या ऊर्जा  का छोटे से वृहद ब्रह्मांडीय गोला । सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में ऊर्जा का संचार छोटे से बड़े में होता है। यह बड्रे से छोटा होता है और छोटे से बड़ा यह बीज है बढ़ कर फल बनता है और फिर फल से दोबारा बीज हो जाता है ।

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़े। मां को बलियों में कुम्हड़े की बलि सबसे ज्यादा प्रिय है। इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है। 

माता कुष्मांडा के दिव्य रूप को मालपुए का भोग लगाकर किसी भी दुर्गा मंदिर में ब्राह्मणों को इसका प्रसाद देना चाहिए। इससे माता की कृपा स्वरूप उनके भक्तों को ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि और कौशल का विकास होता है।

देवी को लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चूड़ी भी अर्पित करना चाहिए। देवी योग-ध्यान की देवी भी हैं। देवी का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का भी है। उदराग्नि को शांत करती हैं। पूजन के बाद देवी के मंत्र का जाप करें।

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।