कुछ फल और सब्जियां ऐसी हैं जिनका अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में जहर बन सकता है। हालांकि हमें सेहतमंद रहने के लिए प्रोटीन, खनिज, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को खाना उचित मानते हैं। लेकिन ये जानकारी बहुत कम लोगों को है कि कुछ खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों के साथ रसायन के रूप में विषाक्त पदार्थ भी होते हैं। क्योंकि कुछ पौधे विषाक्त पदार्थों के जरिए ही फॉर्म किए जाते हैं या कहें रोपे जाते हैं। हालांकि, इनका मानव जाति पर बहुत हम प्रतिकूल या कहें नकारात्मक प्रभाव होता है।

दरअसल, कुछ पौधों या जीवों के माध्यम से विषाक्त पदार्थों को अवॉइड करना मुश्किल हो जाता है। प्लांट्स के जरिए नेचुरल टॉक्सिन्स फूड को हम ठीक वैसे ही कंज्यूम करते हैं जैसे कि पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व हमारे लिए जरूरी है। क्योंकि उनसे वाले फाइटोकेमिकल्स, खनिजों और विटामिन्स के जरिए हमारा शरीर स्वस्थ्य रहता है और हमें बीमारियों से बचाते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको भोजन में पाए जाने वाले कुछ टॉक्सिन्स पदार्थों और उन्हें कम करने के बारे में बता रहे हैं।

प्राकृतिक विषाक्त पदार्थ जहरीले यौगिक होते हैं जो स्वाभाविक रूप से जीवित जीवों में पाए जाते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, हर चीज में थोड़ी बहुत टॉक्सिसिटी जरूर होती है और यह एक डोज होता है जो विषाक्त को गैर विषैले से अलग करता है।

शोध में बताया गया है कि अगर बहुत कम समय में 4-5 लीटर पानी को पिया जाता है तो ये भी जहरीला माना जाता है, क्योंकि इससे हाइपोनेट्रेमिया और सेरेब्रल एडिमा हो सकते हैं। WHO के अनुसार, महासागरों और झीलों में पाए जाने वाले सूक्ष्म शैवाल में प्राकृतिक विषाक्त पदार्थ भी होते हैं, जो मछली जैसे जलीय जीवों के लिए हानिकारक नहीं होते हैं, लेकिन जलजीवों का अधिक सेवन करना मनुष्यों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। सी फूड ही नहीं बल्कि फलों, सब्जियों, नट्स और बीजों का अत्यधिक सेवन करना भी खतरनाक हो सकता है।

लेक्टिंस कार्बोहाइड्रेट बाइंडिंग प्रोटीन हैं, जो बीन्स, आलू, साबुत अनाज और नट्स जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद होते हैं। हालांकि वे फाइबर, प्रोटीन और विटामिन बी का एक बड़ा स्रोत भी हैं और मधुमेह और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए जाने जाते हैं। लेक्टिन नाम का विषात्क प्रोटीन ही सीलिएक बीमारी, रुमेटीइड गठिया और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों और छोटी आंतों से संबंधित समस्याओं के लिए जिम्मेदार है।

एक अध्ययन के अनुसार, 2500 से अधिक पौधों की प्रजातियों में साइनोजेनिक ग्लाइकोसाइड्स जैसे रसायन यौगिक होने की जानकारी दी दई है। ये कम्पाउंड्स परिपक्व पौधों की तुलना में अंकुर और युवा पत्तियों में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इस तरह के यौगिक शाकाहारी जीवों और मनुष्य को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

मानव डिटॉक्सीफाई करने के लिए इनका सेवन कर सकते हैं। कुछ पौधे जिनमें ग्लाइकोसाइड होते हैं उनमें सेब और नाशपाती (Pear) के बीज, खुबानी की गिरी, कसावा, बांस की जड़ें और बादाम शामिल हैं। इनका अधिक सेवन करने से चक्कर आना, पेट में दर्द, सायनोसिस, ब्रेन फॉग, लॉ ब्लड शुगर, सिरदर्द गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं हो सकती हैं।

कुछ बड़ी मछलियों जैसे शार्क, स्वोर्डफिश और मार्लिन में पारा अधिक मात्रा में पाया जाता है। इन मछलियों को बड़ी मात्रा में खाने से टॉक्सिसिटी का खतरा बढ़ सकता है और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, फेफड़े और गुर्दे से संबंधित स्थितियां पैदा हो सकती हैं। एफडीए बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ऐसे जलजीव खाने की सलाह नहीं देता है।

ग्लाइकोकलॉइड की तरह ही सोलनिन और चाकोनीन भी पौधों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले विषाक्त पदार्थ हैं जो सोलानेसी परिवार से संबंधित हैं। ये विषाक्त पदार्थ मुख्य रूप से आलू और टमाटर में कम मात्रा में पाए जाते हैं, लेकिन हरे (green potato) और कुछ डैमेज आलू में अधिक मात्रा में पाए जा सकते हैं। सोलनिन और चाकोनीन के अधिक सेवन से Neurological और gastrointestinal problems जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।

माइकोटॉक्सिन (Mycotoxins) कुछ प्रकार के कवक (fungi) द्वारा निर्मित जहरीले यौगिक होते हैं। कवक की वृद्धि विशेष रूप से गर्म, आर्द्र और नम स्थितियों के दौरान हो सकती है जहां फूड आइटम्स को स्टोर किया जाता है। जैसे कटाई के बाद फसल को एक भंडार ग्रह में रखा जाता है और अगर वहां नमी और गर्माहट है तो हमारे खाद्य पदार्थ कवक मायकोटॉक्सिन से दूषित हो जाते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थ के सेवन से कैंसर की बामीर हो सकती है और इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो सकता है।

पाइरोलिज़िडिन एल्कलॉइड (पीए) जैसे टॉक्सिन्स लगभग 6000 पौधों की प्रजातियों में पाए जाने वाले कार्बनिक यौगिक हैं। पीए मुख्य रूप से हर्बल चाय, मसाले, अनाज और शहद में पाया जाता है। बड़ी मात्रा में सेवन करने पर वे डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

— बोटुलिनम विष क्लोस्ट्रीडियम जीवाणुओं द्वारा पैदा होने वाला एक विषैला प्रोटीन है और कुछ खाद्य पदार्थों जैसे हरी बीन्स, मशरूम, चुकंदर और पालक में पाया जाता है।
— हाइपोग्लाइसीन एक एमिनो एसिड है जो एकी पेड़ के कच्चे फल और बॉक्स बड़े पेड़ के बीज में पाया जाता है। यदि यह एसिड हमारे शरीर में अधिक मात्रा में जाता है तो उल्टी और दस्त का कारण बन सकता है।
— Coumarin एक सुगंधित कार्बनिक रसायन है जो दालचीनी, टोंका बीन्स, ग्रीन टी और गाजर जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। Coumarin की बड़ी मात्रा में धुंधली दृष्टि, मतली और भूख न लगना हो सकती है।