राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तीन सदस्यीय एक दल ने मंगलवार को शिलॉन्ग स्थित पंजाबी हरिजन कॉलोनी का दौरा किया। पीडि़त परिवार के साथ बातचीत कर घटना की पूरी जानकारी ली। आयोग के सदस्य जब यहां पहुंचे तो सिख महिलाएं व युवतियों ने कॉलोनी को स्थानांतरित करने के मुद्दे का विरोध करना शुरु कर दिया।

एक ओर आयोग के प्रतिनिधिमंडल स्थिति का जायजा ले रहा था, तो दूसरी तरफ विरोध प्रदर्शन होता रहा। हालात को देखते हुए यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सिख महिलाओं ने कहा कि आयोग जब यहां आया है तो उन्हें आशा है कि उनकी पीड़ा को समझने का प्रयास होगा। कॉलोनी की महिलाओं ने साफ कहा कि पंजाबी लेन से कोई जाने वाला नहीं है। कितनी भी कोशिशें कर ली जाएं, वे किसी भी सूरत में हटने के लिए तैयार नहीं है। हरिजन कॉलोनी को लेकर सरकार ने जो भी कदम उठाया है वे उसके खिलाफ हैं। 

इस दौरान भूमि सर्वेक्षण को लेकर गठित राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति का भी विरोध किया गया। बता दें कि गत 31 मई की घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इस बीच राज्य सरकार ने पंजाबी हरिजन कॉलोनी की भूमि के सर्वेक्षण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति ने भूमि सर्वेक्षण का काम भी शुरु कर दिया है सर्वेक्षण के बाद ही कॉलोनी के स्थनांतरण पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।