जम्मू-कश्मीर में 1990 के दशक की शुरुआत में आतंकवादी हिंसा शुरू होने के बाद पहली बार पूरे कश्मीर में कोई कर्फ्यू या प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, जहां झंडा फहराने और स्वतंत्रता दिवस के अन्य समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। निजी परिवहन की आवाजाही के साथ कश्मीर में इंटरनेट की सुविधा निर्बाध जारी रही। लोग श्रीनगर शहर और घाटी के अन्य शहरों और कस्बों में बिना किसी प्रतिबंध के आ-जा रहे थे, हालांकि रविवार को सार्वजनिक अवकाश के कारण पैदल चलने वालों की आवाजाही कम थी।

राष्ट्रीय ध्वज फहराने में शामिल होने के लिए शिक्षक अपने-अपने स्कूलों में गए। जम्मू-कश्मीर के शैक्षणिक संस्थानों में ध्वजारोहण समारोह के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई थी।जम्मू-कश्मीर के 23,000 स्कूलों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जबकि केंद्र शासित प्रदेश के सभी पंचायतों, ब्लॉक और तहसील मुख्यालयों पर इसी तरह का झंडा फहराया गया। मंत्रियों और जिला विकास आयुक्तों के बजाय, जिला मुख्यालयों पर जिला विकास समितियों (डीडीसी) के अध्यक्षों द्वारा जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में झंडा फहराया गया।

पुलिस और सेना सहित अन्य सुरक्षा बलों की टुकडिय़ों ने प्रांतीय और जिला मुख्यालयों में समारोह के दौरान मंच के सामने मार्च किया। दिलचस्प बात यह है कि इस साल के स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी अलगाववादी संगठन द्वारा कोई विरोध बंद या ब्लैकआउट का आह्वान नहीं किया गया था