NASA ने अलर्ट किया है कि धरती की ओर 9 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से विशाल Asteroid AF8 आ रहा है। यह ऐस्‍टरॉइड फुटबाल के मैदान के आकार का है और इसी वजह से नासा के वैज्ञानिक ऐस्‍टरॉइड 2021 AF8 पर पैनी नजर गड़ाए हुए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ऐस्‍टरॉइड 4 मई को धरती के पास से गुजरेगा।

नासा का अनुमान है कि यह ऐस्‍टरॉइड 260 से लेकर 580 मीटर के आकार का है। इस ऐस्‍टरॉइड का सबसे पहले वैज्ञानिकों ने मार्च महीने में पता लगाया था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि अंतरिक्ष में पृथ्‍वी के पास से गुजरे अन्‍य बड़े ऐस्‍टरॉइड की तुलना में यह 2021 AF8 काफी छोटा है लेकिन फिर भी यह काफी खतरनाक है। एजेंसी ने कहा कि 2021 AF8 ऐस्‍टरॉइड 9 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्‍वी के पास से गुजर रहा है। 

वैज्ञानिकों ने बताया कि यह ऐस्‍टरॉइड करीब 34 लाख किलोमीटर की दूरी से सुरक्षित गुजर सकता है। इसके बाद भी अंतरिक्ष विज्ञानी अपोलो श्रेणी के इस ऐस्‍टरॉइड पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। इस ऐस्‍टरॉइड को नासा ने संभावित रूप से खतरनाक ऐस्‍टरॉइड की श्रेणी में रखा है। NASA का Sentry सिस्टम ऐसे खतरों पर पहले से ही नजर रखता है। इसमें आने वाले 100 सालों के लिए फिलहाल 22 ऐसे ऐस्टरॉइड्स हैं जिनके पृथ्वी से टकराने की थोड़ी सी भी संभावना है। इस लिस्ट में सबसे पहला और सबसे बड़ा ऐस्टरॉइड 29075 (1950 DA) जो 2880 तक नहीं आने वाला है। इसका आकार अमेरिका की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग का भी तीन गुना ज्यादा है और एक समय में माना जाता था कि पृथ्वी से टकराने की इसकी संभावना सबसे ज्यादा है।

ऐस्टरॉइड्स वे चट्टानें होती हैं जो किसी ग्रह की तरह ही सूरज के चक्कर काटती हैं लेकिन ये आकार में ग्रहों से काफी छोटी होती हैं। हमारे सोलर सिस्टम में ज्यादातर ऐस्टरॉइड्स मंगल ग्रह और बृहस्पति यानी मार्स और जूपिटर की कक्षा में ऐस्टरॉइड बेल्ट में पाए जाते हैं। इसके अलावा भी ये दूसरे ग्रहों की कक्षा में घूमते रहते हैं और ग्रह के साथ ही सूरज का चक्कर काटते हैं। करीब 4.5 अरब साल पहले जब हमारा सोलर सिस्टम बना था, तब गैस और धूल के ऐसे बादल जो किसी ग्रह का आकार नहीं ले पाए और पीछे छूट गए, वही इन चट्टानों यानी ऐस्टरॉइड्स में तब्दील हो गए। यही वजह है कि इनका आकार भी ग्रहों की तरह गोल नहीं होता। कोई भी दो ऐस्टरॉइड एक जैसे नहीं होते हैं।