अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 19 अप्रैल 2021 को इतिहास रच दिया। यह पहला मौका था तब किसी दूसरे ग्रह पर पहली बार हेलिकॉप्टर उड़ाया गया। इस हेलिकॉप्टर का नाम है इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर पहले यह तय हुआ था कि ये 11 अप्रैल को पहली उड़ान होगीै। लेकिन इसे टालकर 14 अप्रैल 2021 की तारीख तय की गई। लेकिन नासा ने कहा है कि हेलिकॉप्टर की टेस्ट उड़ान के दौरान टाइमर सही से काम नहीं कर रहा था, इसलिए उड़ान को टाल दिया गया था।

नासा ने बताया कि टाइमर की गलती की वजह से प्री-फ्लाइट मोड से फ्लाइट मोड में आने की व्यवस्था थो़ड़ी गड़बड़ हो गई थी। इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर पूरी तरह से सुरक्षित और धरती से संपर्क में है। इसमें लगा धरती से कमांड सही से नहीं ले रहा था। जिसकी वजह से फ्लाइट सीक्वेंस कमांड धीमी हो गई थी। इसलिए इसे दुरुस्त करके 19 अप्रैल की तारीख तय की गई थी।आपको बता दें कि मार्स पर्सिवरेंस रोवर के पेट के नीचे कवर करके भेजा गया इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर 5 अप्रैल को मंगल ग्रह की सतह पर उतारा गया था। यह हेलिकॉप्टर मंगल ग्रह की सतह और वहां के वायुमंडल में रोटरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा सकता है कि नहीं। 19 अप्रैल की उड़ान एक प्रयोगिक उड़ान थी। इससे यह पता करना जरूरी था कि हम दूसरे ग्रह पर हेलिकॉप्टर उड़ा सकते हैं या नहीं।इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर को रोवर ने जमीन से चार इंच ऊपर छोड़ाण् सतह पर हेलिकॉप्टर के गिरने के बाद रोवर आगे बढ़ गया। 1.8 किलोग्राम के इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर को पर्सिवरेंस रोवर को अपने नीचे पहियों के ऊपर पेट में एक कवर के अंदर सुरक्षित रखा था। नासा ने ट्विटर हैंडल पर लिखा था कि जल्द ही इस रोवर के पेट से उड़ने वाला पक्षी निकलेगा। यह नए रास्ते खोलेगा।इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर के अंदर सौर ऊर्जा से चार्ज होने वाली बैटरी लगी है। इसके पंखों के ऊपर सोलर पैनल लगा है। जो जितना गर्म होगा उतना बैटरी को ताकत मिलेगी। साथ ही हेलिकॉप्टर के अंदर एक गर्मी बनी रहेगी ताकि वह मंगल ग्रह के बदलते तापमान को बर्दाश्त कर सके। मंगल पर दिन में इस समय 7.22 डिग्री सेल्सियस तापमान है। जो रात में घटकर माइनस 90 डिग्री सेल्सियस तक जाता है।ऐसा माना जा रहा था कि इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर 14 अप्रैल से पहले 11 अप्रैल को अपनी पहली उड़ान भरेगा। जिसके डेटा धरती को एक दिन बाद यानी 12 अप्रैल को मिलेंगे। इस रोटरक्राफ्ट यानी हेलिकॉप्टर को बनाने में नासा ने 85 मिलियन डॉलर्स यानी 623 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। इसके पंखे हर मिनट 2537 राउंड लगाते हैं।जेजेरो क्रेटर पर कई उड़ानें भरेगा। ये उड़ाने अगले 31 दिनों तक होंगी। ये दिन मंगल ग्रह के मुताबिक होंगे। हर उड़ान 16.5 फीट से ज्यादा ऊंचाई की नहीं होगी। हेलिकॉप्टर एक बार में 300 फीट की दूरी तय करेगा। इसके बाद उसे लैंड कराकर दोबारा चार्ज करने के लिए छोड़ दिया जाएगा।नासा के वैज्ञानिकों ने कहा कि अभी तक धरती के अलावा किसी भी दूसरे ग्रह पर रोटरक्राफ्ट या ड्रोन हेलिकॉप्टर नहीं भेजा गया है। यह पहली बार है जब इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर मंगल ग्रह पर उड़ान भरेगा। अगर इसे उड़ान के समय सफलता हासिल करता है तो भविष्य में अन्य ग्रहों पर ऐसे ड्रोन या रोटरक्रॉफ्ट जैसे यान भेजे जा सकेंगे।इस मिशन पर काम करने वाली टीम ने कहा कि इग्नयूइटी की कुछ उड़ानें पूरी होने के बाद, पर्सिवरेंस रोवर अपने मुख्य उद्देश्य पर फोकस करेगा। यह मार्स पर प्राचीन जीवन के संकेतों का पता करेगा। पृथ्वी पर लौटने से पहले सैंपल जमा करेगा।पर्सिवरेंस मार्स रोवर और इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर मंगल ग्रह पर कार्बन डाईऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाने का काम करेंगे। मौसम का अध्ययन करेंगे। ताकि भविष्य में मंगल ग्रह पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को आसानी हो। रोवर में लगे मार्स एनवायर्नमेंटल डायनेमिक्स एनालाइजर यह बताएगा कि मंगल ग्रह पर इंसानों के रहने लायक स्थिति है या नहीं। इसमें तापमान, धूल, वायुदाब, धूल और रेडिएशन आदि का अध्ययन किया जाएगा।भारतीय मूल की वनीजा रूपाणी ने हेलिकॉप्टर को इंजीन्यूटी नाम दिया है। हिंदी में इसका मतलब है किसी व्यक्ति का आविष्कारी चरित्र। वनीजा अलबामा नार्थ पोर्ट में हाई स्कूल जूनियर हैं। मंगल हेलिकॉप्टर के नामकरण के लिए नासा ने नेम द रोवर नाम से एक प्रतियोगिता आयोजित की थी। जिसमें 28000 प्रतियोगी शामिल हुए थे। इसमें वनीजा की ओर से सुझाए गए नाम को फाइनल किया गया।आपको बता दें कि पिछले 11 दिनों में दो देशों के मिशन मंगल पर जा चुके हैं। अब अमेरिका अपना मिशन भेजने वाला है। 19 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात ने मिशन होप भेजा था। 23 जुलाई को चीन ने तियानवेन-1 मार्स मिशन भेजा था।