चीन के अनिंयत्रित रॉकेट का मलबा हिंद महासागर में मालदीव के पास गिरा है। इसने भले ही किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है लेकिन चीन के ऊपर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा बुरी तरह भड़क गया है। नासा ने चीन को चेतावनी देते हुए इस पूरे कारनामे को गैर जिम्मेदाराना बताया है।

दरअसल, चीन का अनिंयत्रित रॉकेट भारतीय समयानुसार 9 मई यानी रविवार को सुबह करीब 8 बजे के आसपास हिंद महासागर में मालदीव के पास गिर गया। इससे पहले इसके न्यूजीलैंड के आसपास किसी द्वीप पर गिरने की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन यह बिना किसी को नुकसान पहुंचाए हिंद महासागर में गिरा है।

यह अनियंत्रित रॉकेट दुनिया भर के लोगों के लिए चिंता का विषय का बना हुआ था। इसी बीच अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस पूरे मामले पर अपना बयान जारी किया है। नासा ने कहा क‍ि यह स्पष्ट है कि चीन अपने अंतरिक्ष मलबे के बारे में जिम्मेदार मानकों को पूरा करने में विफल हो रहा है।

नासा प्रशासन के अधिकारी बिल नेल्‍सन ने चीन की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह जरूरी है कि चीन और अन्‍य देश अंतरिक्ष में 'जिम्‍मेदारी और पारदर्शिता' के साथ काम करें तभी ठीक रहेगा। इतना ही नहीं नासा ने चीन को चेतावनी भी दे दी और नियमों को याद दिलाया।

नासा ने चीन को चेतावनी देते हुए नियमों को याद दिलाया। उसने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि चीन और सभी अंतरिक्ष यात्री राष्ट्र, वाणिज्यिक संस्थाएं अंतरिक्ष में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी और पारदर्शिता से कार्य करें।

नेल्‍सन ने अपने बयान में यह भी कहा कि अंतरिक्ष में गतिविधियां चलाने वाले देशों को स्‍पेस ऑब्‍जेक्‍ट के फिर से धरती के वातावरण में इंट्री के दौरान पृथ्‍वी पर जान और माल के नुकसान के खतरे को कम से कम करने पर काम करना चाहिए, साथ ही अंतरिक्ष में इन अभियानों को लेकर और ज्‍यादा पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
चीन के इस रॉकेट का नाम लॉन्ग मार्च 5बी वाई2 है। यह रॉकेट 28 अप्रैल को चीन के तियानहे स्पेस स्टेशन को बनाने के लिए चीन द्वारा ही छोड़ा गया था। यह एक मॉड्यूल लेकर स्पेस स्टेशन तक गया था। मॉड्यूल को तय कक्षा में छोड़ने के बाद इसे नियंत्रित तरीके से धरती पर लौटना था। लेकिन चीन की स्पेस एजेंसी का इस पर से नियंत्रण खत्म हो गया था।
जैसे ही यह सूचना दुनियाभर को पता चली कि चीन ने अपने रॉकेट से नियंत्रण खो दिया है, हड़कंप मच गया। दुनियाभर के अंतरिक्ष विज्ञानी हतप्रभ रह गए। लोग अंदाजा लगाने लगे कि यह रॉकेट कहां गिरेगा और कितनी तबाही मचाएगा। सैटलाइट ट्रैकरों के अनुसार यह 100 फीट लंबा और 16 फीट चौड़ा था।

इतना ही नहीं जमीन पर मौजूद अलग-अलग देशों के राडार इस रॉकेट पर नजर बनाए हुए थे। ताकि अगर यह किसी देश के ऊपर आता है तो पहले ही इसकी सूचना लोगों को दे दी जाए। इसकी गति और लगातार बदल रही ऊंचाई की वजह से यह पता करना मुश्किल हो रहा था कि ये धरती पर कब, किस दिन और कहां गिरेगा।
हालांकि यह जरूर बताया गया था कि धरती के वायुमंडल में आते ही इसका अधिकतर हिस्सा जलकर खाक हो जाएगा। लेकिन छोटा-मोटा हिस्सा भी आबादी वाले इलाके में गिरता तो नुकसान हो सकता था। इसलिए सबकी नजरें इसी ओर थीं कि यह कब धरती पर गिरेगा।

इस रॉकेट के बारे में हॉवर्ड स्थित खगोलविद ने बताया था कि इसका रास्‍ता न्‍यूयॉर्क, मैड्रिड, पेइचिंग से उत्‍तर की ओर और दक्षिण में चिली तथा न्‍यूजीलैंड की ओर है। इस दायरे में यह चीनी रॉकेट कहीं भी टकरा सकता है। यह समुद्र या आम जनसंख्‍या वाले इलाके में गिर सकता है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिसिस्ट जोनाथन मैकडॉवेल ने बताया कि पिछले तीन दशकों में अब तक इतनी भारी वस्तु अंतरिक्ष से धरती पर नहीं गिरी। लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट के कोर का वजन करीब 19.6 टन यानी 17,800 किलोग्राम था। इससे पहले 1991 में 43 टन का सोवियत स्पेस स्टेशन का सल्यूट-7 धरती पर अनियंत्रित तरीके से गिरा था।
इससे पहले इससे पहले यूरोपियन स्पेस एजेंसी के स्पेस सेफ्टी प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख होल्गर क्राग ने भी बताया था कि इस समय यह बता पाना मुश्किल है कि इस रॉकेट का कितना हिस्सा बचकर धरती पर आएगा। लेकिन सारी संभावनाओं को धता बताते हुए आखिरकार चीन का यह रॉकेट हिंद महासागर में गिरा। गनीमत इस बात की रही कि जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

एक तथ्य यह भी है कि मई 2020 में भी चीन ने ऐसा ही रॉकेट अंतरिक्ष में भेजा था। उसने भी इसी तरह से धरती पर अनियंत्रित प्रवेश किया था। और यह पश्चिमी अफ्रीका के गांव कोटे डि इवॉयर में गिरा था। लेकिन यहां किसी के मारे जाने की कोई खबर नहीं आई थी। इसके बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के चीफ ने इस पर भी चीन की स्पेस एजेंसी को काफी लताड़ा था।

गौरतलब है कि चीन अपना स्पेस स्टेशन बना रहा है। इसका नाम है तियानहे है। इस स्पेस स्टेशन को बनाने के लिए चीन को अभी 11 बार ऐसे रॉकेट भेजने होंगे। अभी जो रॉकेट धरती के ऊपर मंडरा रहा है वो पहली उड़ान थी। ऐसा माना जा रहा है कि चीन अपना स्पेस स्टेशन 2022 तक पूरा कर लेगा।