एक पोल के अनुसार 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस (Babri demolition) को लेकर कांग्रेस और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच दोष समान रूप से बंटा हुआ प्रतीत होता है, जिसकी 30वीं बरसी सोमवार से शुरू हो रही है। 5 दिसंबर, 2021, 1942 लोगों के रैंडम सैंपलिंग के आधार पर यह जानकारी मिली है। उत्तरदाताओं को उन तीन राजनेताओं में से एक को चुनने का विकल्प दिया गया था, जिन्हें वे विध्वंस के लिए अधिक जिम्मेदार मानते थे। अधिकांश विश्लेषकों ने इस कृत्य के लिए भाजपा के शीर्ष नेताओं को दोषी ठहराए जाने की अपेक्षा की थी। लेकिन परिणाम चौंकाने वाले थे।

दोष का सबसे बड़ा हिस्सा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय पीवी नरसिम्हा राव (PV Narasimha Rao) के हिस्से गया है। 36.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विध्वंस के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया। इस क्रम में दूसरे स्थान पर भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री एल.के. आडवाणी (LK Advani) का नाम है। आश्चर्यजनक रूप से इस क्रम में तीसरे स्थान पर लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) को जिम्मेदार ठहराया, जबकि विध्वंस से लगभग 18 महीने पहले उनकी हत्या कर दी गई थी।

पार्टियों के बीच इस मुद्दे पर कोई गहरा ध्रुवीकरण नहीं दिख रहा है। एनडीए के 32.4 फीसदी मतदाता आडवाणी (LK Advani) को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि 37.6 फीसदी विपक्षी मतदाताओं ने उन्हें जिम्मेदार ठहराया है। इसी तरह, जहां एनडीए के 36.1 फीसदी मतदाता राव को जिम्मेदार मानते हैं, वहीं विपक्ष के 35.2 फीसदी मतदाताओं ने उन्हें जिम्मेदार ठहराया है। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, राजीव गांधी की 1991 में हत्या कर दी गई थी। पी.वी. नरसिम्हा राव (PV Narasimha Rao)  प्रधानमंत्री थे और एल.के. आडवाणी वास्तव में उस समय मौजूद थे जब विवादित ढांचा गिराया गया था।