कोहिमा। अपने पिता एस.लिजित्सु की गद्दी बचाने के लिए उनके बेटे के.लिजित्सु ने मुख्यमंत्री के सलाहकार का पद लेने से सोमवार को इनकार कर दिया। मुख्यमंत्री व अपने पिता एस.लिजित्सु को लिखे पत्र में के.लिजित्सु ने कहा कि जनता के अन्य जरूरी कामों के कारण वह सौंपा हुआ कार्य स्वीकार नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि एस.लिजित्सु ने हाल ही में अपने बेटे को खुद का सलाहकार नियुक्त कर दिया था। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी। कांग्रेस का आरोप था कि मुख्यमंत्री भाई भतीजावाद को बढ़ावा दे रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री टी.आर जेलियांग ने यह दावा कर सनसनी मचा दी थी कि एस.लिजित्सु की सरकार के पास बहुमत नहीं है। जेलियांग अचानक दिल्ली गए और नई सरकार बनाने का दावा किया। इसके बाद के.लिजित्सु ने सलाहकार पद से इस्तीफा दिया। आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब के.लिजित्सु ने अपने पिता के लिए त्याग किया है। 

24 मई को उन्होंने अपनी विधानसभा सीट नॉर्दन अंगामी से इस्तीफा दे दिया था ताकि उनके पिता और मौजूदा मुख्यमंत्री एस.लिजित्सु विधानसभा के सदस्य बन जाएं। जब से के.लिजित्सु ने इस्तीफा दिया है तब से यह सीट खाली है। इस सीट पर 29 जुलाई को उप चुनाव है। एस.लिजित्सु फिलहाल विधानसभा सदस्य नहीं है। जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब वे विधायक नहीं थे। उन्हें 6 माह के भीतर विधायकी हासिल करनी है। नागालैण्ड की मौजूदा स्थिति राज्य में फरवरी में हुए राजनीतिक संकट का रिपीटेशन है। 4 कैबिनेट मंत्रियों के निलंबन और 11 संसदीय सचिवों की बर्खास्तगी से राज्य में फिर राजनीतिक संकट खड़ा हुआ है। गौरतलब है कि नागालैण्ड में राजनीतिक हलचल 10 नॉर्दन अंगामी विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव से करीब एक सप्ताह पहले हुई। आलोचकों का कहना है कि यह कुछ नेताओं की मौजूदा मुख्यमंत्री को उप चुनाव लडऩे से रोकने की कोशिश है क्योंकि अगर वह चुनाव जीत गए तो मुख्यमंत्री बने रहेंगे और उनके नेतृत्व में डीएएन सरकार का कार्यकाल पूरा हो जाएगा।