नागालैंड विधानसभा चुनावों में एनपीएफ को 27, जद(यू) को एक तथा एनपीपी को दो सीटें मिली हैं, लेकिन जब भाजपा-एनडीपीपी को भी 27 सीटें मिल गई तो देर शाम दामन बदलने का सिलसिला चला। जद(यू) के विधायक ने एनपीएफ से नाता तोड़ा और भाजपा+ को समर्थन का एलान किया। एक निर्दलीय भी भाजपा के साथ आ गया। यानी भाजपा+ के कुल 29 विधायक हो गए। एनपीपी के दो विधायकों के भी भाजपा में जाने के आसार हैं। इस बीच, भाजपा नेता राम माधव ने 32 विधायकों का दावा किया है।

दूसरी तरफ मेघालय में सत्तारुढ़ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन भाजपा नेशनल पीपुल्स पार्टी को आगे कर यूडीपी के साथ सरकार बनाने की कोशिश करेगी। अन्य पार्टियों व निर्दलीय का एनपीपी को साथ मिल सकता है। नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के संयोजक डॉ. हिमंत विश्व शर्मा सरकार गठन के लिए शिलांग पहुंच चुके हैं। वे जोड़तोड़ के माहिर माने जाते हैं। नेडा में एनपीपी और यूडीपी शामिल हैं। एनपीपी गठबंधन की सरकार होने से पीए संगमा की पुत्री अगाथा संगमा सीएम बन सकती हैं। 


वहीं अगर त्रिपुरा की बात की जाए तो यहां भाजपा ने माकपा के 25 वर्ष पुराने गढ़ को ढहाते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। लेफ्ट का यह किला भी केसरिया रंग में रंग गया है। पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के शनिवार को आए नतीजों ने देश के सियासी नक्शे को बदल दिया। देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि भाजपा ने वाम का गढ़ भेदा है। अब देश के 19 राज्यों में भाजपा या उसके गठबंधन की सरकार हो गई है। नगालैंड और मेघालय में सियासी समीकरण के बाद यह आंकड़ा बदल भी सकता है। त्रिपुरा में भाजपा का इंडिजेनास पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा से गठबंधन था। गठबंधन दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगा। पिछले चुनावों में 1.5 प्रतिशत वोट पाने वाली भाजपा को 42 प्रतिशत से अधिक मत मिले।