नागालैंड के चुनाव नतीजे घोषित हो चुके हैं। यहां सरकार बनाने के समीकरण बीजेपी के पक्ष में नजर आ रहे हैं। नागालैंड भी रंगा भगवा रंग में, भाजपा ने अपने सहयोगी पार्टी एनडीपीपी के साथ सरकार बनाने जा रही है। नागालैंड में एक सीट पर जेडीयू  जीती है। जेडीयू बीजेपी को समर्थन के लिए तैयार है। इस बीच भाजपा नागालैंड में अगली सरकार अन्य दलों के साथ मिलकर बनाएगी। जबकि राज्य में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है।

बता दें कि बीजेपी ने नगा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) की अगुआई वाले डिमोक्रेटिक अलायंस ऑफ  नगालैंड (डीएएन) के साथ अपना 15 वर्ष पुराना संबंध तोड़कर कुछ समय पहले बनी नेशनल डिमोक्रेटिक पॉलिटिकल पार्टी (एनडीपीपी) के साथ गठबंधन किया था।

भाजपा नार्थर्इस्ट विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मुक्त राज्य का ध्येय लेकर चल रही थी तो इस बार वहीं देखने को मिला। नागालैंड पूरी तरफ कांग्रेस मुक्त हो गया। 2013 के विधानसभ चुनाव में जहां कांग्रेस के खाते में 8 सीटें आर्इ थी तो वहीं इस बार कांग्रेस खाता भी नहीं खेल पार्इ। तो वहीं 38 सीटें जीतने वाली एनपीएफ मात्र  19 सीटों पर सिमट गर्इ है। 2013 के विधानसभ चुनाव में निर्दलीय आठ सीटों पर जीती थी आैर इस बार ये आकड़ा छह पर ही रूक गया।
बता दें कि राज्य में 60 सदस्यीय विधानसभा में 59 सीटों पर मंगलवार को मतदान हुए थे। नागालैंड में पहला रूझान भाजपा के पक्ष में था। राज्य में भाजपा की सहयोगी पार्टी एनडीपीपी के उम्मीदवार आैर पूर्व मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो अंगामी-II से निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं इसलिए राज्य में मात्र 59 सीटों पर मतदान हुआ।

बता दें कि राज्य में 11,89,264 मतदाता हैं और इनमें से 25,876 नए मतदाता हैं। इनमें लगभग 6,00,536 पुरुष और 5,88,728 महिला मतदाता हैं। राज्य में 550 से अधिक मतदान केंद्र हैं। चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी या ऑफलाइन विडियोग्राफी भी करवाई गर्इ थी। नागालैंड में चुनाव से पहले राजनीतिक ताकतों के समीकरणों में बदलाव हुआ है।एनपीएफ ने 58 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) ने एनपीएफ के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया था। लोकसभा के पूर्व स्पीकर पी ए संगमा की एनपीपी मणिपुर में बीजेपी की अगुआई वाली सरकार में सहयोगी है, लेकिन मेघालय विधानसभा चुनाव में अकेले खड़ी थी। नागालैंड में पिछले दो वर्षों में नेतृत्व का संकट खड़ा हुआ है।
शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 पर्सेंट आरक्षण का लगातार विरोध कर रहे आदिवासी संगठनों के सामने झुकते हुए पिछले वर्ष फरवरी में टी आर जेलियांग ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जुलाई में बहुत से विधायकों के विद्रोह करने के कारण मुख्यमंत्री एस लिजिएत्सु को हटना पड़ा था।चुनाव के दौरान विपक्षी दल एनपीएफ की अगुआई वाली सरकार पर लगातार हमले कर रही थी। विपक्ष का आरोप था कि राज्य सरकार ने बढ़ते भ्रष्टाचार और विकास की कमी जैसी बड़ी समस्याओं को अनदेखा किया है। चुनाव में सड़कों की खराब स्थिति भी एक अन्य मुद्दा है। नागालैंड चुनाव में धर्म के मुद्दे पर भी काफी जोर है। एनपीएफ के अध्यक्ष लिजिएत्सु ने नगा लोगों को किसी भी कीमत पर ईसाई आस्थाए संस्कृति और पहचान की सुरक्षा करने को कहा है। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार के तहत ईसाइयों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
एग्जिट पोल के आंकड़ेनागालैंड विधानसभा चुनाव के लिए हुए मतदान के बाद सामने आए एग्जिट पोल में बताया गया था कि बीजेपी-एनडीपीपी गठबंधन बड़े दल के रूप में उभर रही। नेफ्यू रियो की अगुवाई वाले एनडीपीपी के साथ बीजेपी ने गठबंधन किया। जन की बात-न्यूज एक्स के एग्जिट पोल में बताया गया था कि बीजेपी को सहयोगियों के साथ 27-32 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा 60 सदस्यों वाली विधानसभा में एनपीएफ को 20-25 सीटें, जबकि कांग्रेस को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। सीवोटर के एग्जिट पोल की बात करें तो बीजेपी गठबंधन को 25 से 31 मिलने कह बात कही गर्इ थी।  वहीं कांग्रेस के लिए कहा गया था कि शून्य से चार सीटों के बीच ही सिमट जाएगी। एनपीएफ 19 से 25 सीटों के बीच सीटें जीत सकने को अनुमान था।