कोहिमा। पूरे देश में इस पर बहस हो रही है कि सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने और इनकम टैक्स रिटन्र्स के लिए आधार अनिवार्य होना चाहिए या नहीं वहीं नागालैण्ड में बाहरी लोगों को (गैर-स्वदेशी आबादी) को अनोखी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। समस्या का केन्द्र नागालैण्ड सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन है, जो इन निवासियों के आधार कार्ड प्राप्त करने की राह में रोड़ा बना हुआ है। 

कोहिमा में एचडीएफसी बैंक में काम करने वाले सोमुंग उन लोगों में शामिल है जो इस नोटिफिकेशन से प्रभावित हैं। सोमुंग मूलत: मणिपुर के रहने वाले हैं। सोमुंग आधार नंबर के लिए खुद का नाम लिखवाने मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के दफ्तर गए थे। सोमुंग ने कहा, मुझे बताया गया कि मेरा कोहिमा में रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। मुझे आधार प्राप्त करने के लिए अपने गृहनगर जाना होगा। सोमुंग इस तरह के अकेले शख्स नहीं है। पूर्व पत्रकार माइकल(परिवर्तित नाम) को भी इसी तरह का सामना करना पड़ा। माइकल भी मूलत: मणिपुर के रहने वाला है। हालांकि वह नगा ट्राइब से ताल्लुक रखते हैं। माइकल को भी कहा गया कि आधार नंबर के आपको अपने गृह नगर जाना होगा। 

गौरतलब है कि सरकारी सब्सिडी के लिए आधार नंबर अनिवार्य है। नागालैण्ड उन 10 राज्यों में शामिल है जिन्हें नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर स्कीम के तहत कवर किया गया है। नवंबर 2016 में नागालैण्ड यूआईडीएआई के दायरे में आया था। समाचार पत्र मोरंग एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के गृह मंत्रालय को आधार नामांकन के लिए नोडल विभाग बनाया जा सकता है। गृह आयुक्त को स्टेट रजिस्ट्रार और उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और एसडीओ के सभी दफ्तरों को नामांकन एजेंसियों रूप में नामित किया जाएगा। 

ऐसा नागालैण्ड में आधार नामांकन की स्पीड को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। गौरतलब है कि आधार नामांकन के मामले में नागालैण्ड (आबादी के पर्सेंटेज के मामले में)अन्य राज्यों से काफी पीछे है। संसद में अतारांकित सवाल के जवाब में आईटी मंत्रालय ने कहा था कि नागालैण्ड में 11,54,128 लोगों ने आधार के लिए नामांकन करवाया है। यह संख्या राज्य की कुल आबादी(2011 की जनगणना) की आधे से कुछ ज्यादा है।