कुछ महीने पहले प्लैनेट लैब्स इंक ने कुछ तस्वीरें जारी की थीं, जिसमें यमन से थोड़ी दूर एक ज्वालामुखी द्वीप मयुन पर एक रहस्यमयी निर्माणाधीन हवाई अड्डा देखा जा सकता था। तस्वीरों से पता चलता है कि यहां 1.8 किलोमीटर लंबे रनवे का निर्माण किया जा रहा है। यमन की सरकार का दावा है कि इस निर्माण के पीछे संयुक्त अरब अमीरात का हाथ है। 

गौरतलब है कि यह द्वीप ऊर्जा शिपमेंट और कमर्शियल कार्गो दोनों के नजरिए से दुनिया का एक अहम चेकप्वाइंट है। किसी भी देश ने इस निर्माण का दावा नहीं किया है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस निर्माण के पीछे यूएई है। यूएई ने 2019 में घोषणा की थी कि वह यमन के हूती विद्रोहियों से जूझ रहे सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य अभियान से अपने सैनिकों को वापस ले रहा है। मयुन द्वीप को ‘पेरिम द्वीप’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य यमन से सिर्फ 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस द्वीप के एक ओर अदन की खाड़ी और एक ओर लाल सागर है। यहां बन रहे एयरबेस को लेकर कई सवाल और चिंताएं भी खड़ी हो रही हैं। 

ये द्वीप अपने आप में बेहद शक्तिशाली है। जो भी देश इस द्वीप पर कब्जा करेगा उसकी मुट्ठी में पूरी दुनिया का तेल निर्यात रहेगा। ये द्वीप दुनिया का एक अहम चेकप्वाइंट है जो चाहे तो स्वेज नहर से होने वाले व्यापार को बंद कर सकता है। 2016 में यमन के हूती विद्रोहियों ने इस द्वीप पर कब्जा कर लिया था। हालांकि अब्दराबुह मंसूर हादी सरकार की समर्थक गल्फ अरब फोर्सेज ने इसे हूती के कब्जे से मुक्त कराया। इस गठबंधन में कई देशों की सेनाएं शामिल हैं, जिसका नेतृत्व सऊदी अरब करता है।