म्यांमार में उग्रवादी संगठन से प्रताडि़त करीब 300 नागरिक सीमा पार कर भारत में घुस आए। इन्होंने दक्षिण मिजोरम के दो गांवों में शरण ले रखी है। म्यांमार के 300 नागरिकों में से ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। समाचार पत्र द टेलिग्राफ ने असम राइफल्स के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। 

रविवार को असम राइफल्स के अधिकारी म्यांमार के नागरिकों के पास पहुंचे। म्यांमार के करीब 200 नागरिकों ने म्यांमार की सीमा से लगे मरा ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के लुंगपुक और खैखाई गांवों में शरण ले रखी है। अन्य 77 ने खैखाई गांव में शरण लेने के लिए सीमा पार की। भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा में लगी असम राइफल्स ने बयान जारी कर बताया कि शरणार्थी म्यांमार के रैले गांव के हैं। 

म्यांमार स्थित उग्रवादी संगठन ने उनको धमाकर घरों से निकाल दिया। मरा ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल मिजोरम का दक्षिणी हिस्सा है,जिसकी 510 किलोमीटर सीमा 1624 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार से लगती है। अधिकारी ने कहा, घबराए ग्रामीणों ने असम राइफल्स से संपर्क किया और बड़ी संख्या में म्यांमार के नागरिकों की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी। 

ग्रामीणों ने उन्हें खाना और पानी दिया। हमारी टीम रविवार सुबह गांव पहुंची। ग्रामीणों ने हमें बताया कि एक अन्य ग्रुप भी गांव में शरण ले रहा था। दोपहर में हमारी टीम ने गांव में 77 अन्य शरणार्थियों को पाया। म्यांमार का दक्षिणी हिस्सा देश के दूर-दराज वाले इलाकों में से एक है। इस इलाके में टेलीकम्यूनिकेशन नेटवर्क और सड़कों की हालत बहुत खराब है। असम राइफल्स ने उनकी मदद के लिए सैहा डिस्ट्रिक्ट के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया। चंपई जिले के जोखावथर गांव में असम राइफल्स के पोस्ट कमांडर ने म्यांमार की सेना से बात की। उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा के साथ शरणार्थियों को वापस ले जाने को कहा है।