केंद्र सरकार ने इस बार सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4650 रूपए प्रति क्विंटल घोषित किया है जो पिछली बार से 225 रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा है लेकिन दिलचस्प है कि बाजार में सरसों का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से एक से लेकर दो हजार रूपए ज्यादा है जिसके चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सरसों उत्पादक किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। सहारनपुर मंड़ी परिषद की उपनिदेशक रिंकी जायसवाल ने गुरूवार को यूनीवार्ता को बताया कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के बाजारों में सरसों का बाजार भाव छह से सात हजार रूपए प्रति क्विटंल तक है और किसान को लाभकारी मूल्य मिल रहा है जिससे उनके चेहरे खिले हुए हैं।

देवबंद के बड़े आढ़ती बलराम सिंघल ने बताया कि आज बाजार में सरसों 5800 रूपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी है जबकि दो दिन पहले बाजार भाव 6000 रुपए प्रति क्विंटल था। मुजफ्फरनगर मंडी में कल बाजार भाव थोड़ी देर के लिए जरूर 4200 रूपए प्रति क्विंटल रहा लेकिन किसानों ने इस भाव पर सरसों नहीं बेची। मंड़ी उपनिदेशक ने बताया कि राजस्थान और अलीगढ़ तक के खरीददार यहां सरसों की खरीददारी को पहुंच रहे हैं। 

अभी तक पांच हजार मीट्रिक टन सरसों किसान बेच चुके हैं। सरसों उत्पादक किसान कस्बों की मंड़ी तक पहुंच रहे हैं। पैदावार भी अच्छी है। आगरा तक से व्यापारी सरसों की खरीद करने के लिए पहुंच रहे हैं। देवबंद क्षेत्र के गांव चंदेना कोली निवासी प्रगतिशील किसान दीपक कुमार शर्मा इस बार सरसों के ऊंचे दाम मिलने से गदगद हैं। उन्होंने बताया कि इस बार सरसों की पैदावार करने वाले किसानों को दोहरा लाभ मिल रहा है। इस बार सरसों में कोई रोग नहीं लगा और पिछले साल की तुलना में डेढ़ क्विंटल प्रति बीघा के औसत से सरसों की पैदावार हुई। जबकि पिछले साल यह पैदावार पौन या एक क्विंटल तक ही थी।