दरंग जिला के अति पिछड़े अंचल सियालमारी नेपाली गांव के निवासी अब्दुल हासेम और मजेदा बेगम का बड़ा पुत्र मुस्तफा जमाल कैंसर से जूझकर मैट्रिक परीक्षा में एक मिसाल कायम किया । मुस्तफा जमाल ने कहा कि मुझे सब कह रहे थे कि तुम आराम करो, पढ़ाई-लिखाई से क्या होगा, तुम्हारा जीवन अब अंतिम चरण में है। मां  पिता के पास इलाज के पैसे भी नहीं है । लेकिन मैं नहीं माना । मैंने खुद को अंदर से मज़बूत किया । 

शिक्षकों ने मेरे आत्मविश्वास को  बढ़ाया और कैंसर चिकित्सा की  जटिल प्रक्रिया व दर्द के बीच जैसे-तैसे पढ़ाई की और परीक्षाफल सबके सामने है । मैंने हार नहीं मानी । आज भी इलाज़ चल रहा है और चिकित्सकों   का कहना है कि मेरी मज़बूत इच्छाशक्ति के काण मैं ठीक हो रहा हूं। मालूम हो कि मुस्तफा जमाल स्थानीय कोपाटी जातीय विद्यालय में पढ़ता है ।

 वह शुरू से ही पढाई में तेज था और विद्यालय के शिक्षकों तथा मां-पिता का उस पर बहुत भरोसा था । मुस्तफा ने बताया कि वह चार विषयों में लेटर मार्क्स के साथ मैट्रिक परीक्षा में 83 प्रतिशत अंक प्राप्त किया है । उसने बताया कि यह जीवन बहुत मूल्यवान है । इस जीवन में बहुत सी समस्याएं आती हैं, बीमारी होती है। इन समस्याओं और बीमारियों से हमें घबराने के बजाय मजबूती से सामना करना चाहिए। वह कैंसर से लड़  कर ही कैंसर को हरा पाने में सफल हुआ है ।