उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections) में अपनी पार्टी का खाता खोलने को बेकरार आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष एवं हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (MP Asaduddin Owaisi) ने कहा कि झूठे वादों के कारण अपनी दुर्दशा करने वाले मुस्लिम समाज को अब कांग्रेस (congress), सपा (SP) और बसपा (BSP) जैसे मौकापरस्त दलों के बहकावे में नहीं आना चाहिये और बगैर भय के उनकी पार्टी की सरकार बनाने में सहयोग देना चाहिये। 39 फीसद मुस्लिम आबादी वाले सहारनपुर में जनता रोड पर खुर्द अड्डा स्थित जनसभा में रविवार दोपहर पहुंचे ओवैसी मुस्लिम नौजवानों की उत्साही भीड़ को देखकर गदगद हो गये। 

उन्होने कहा कि कांग्रेस (congress), सपा (SP) और बसपा (BSP) ने मुसलमानो से झूठे वायदे किये जिससे उनकी हालत बद से बदतर होती चली गई। अब समय आ गया है कि वे डर, खौफ और गुलामी की स्थिति से बाहर आए और अपनी खुद की पार्टी एआईएमआईएम के साथ सीना तानकर खडे हो और उसी को वोट दे और समर्थन करे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम अगर किसी के मोहताज है तो अल्लाह के है। 

उन्होंने मुस्लिम युवकों से कहा कि वे अपने दिलों में इंकलाब पैदा करे, अपने दिलों में तब्दीली पैदा करे और जिंदा कौम की तरह व्यवहार करे। कांग्रेस जैसी पार्टी ने 60 सालो तक मुसलमानों को बेवकूफ बनाकर उनका वोट लेकर शासन किया। मुसलमान बर्बादी के दहाने पर खडा कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों की 19 फीसद आबादी है। वे इस सूबे में अपनी पार्टी का जनाधार और अपनी कयादत बनाने में सफल हो सकते है। 

सहारनपुर लोकसभा के सांसद हाजी फजलुर्रहमान कुरैशी और सहारनपुर देहात से कांग्रेस विधायक मसूद अख्तर दो मुस्लिम जनप्रतिनिधि ही 39 फीसद वाले इस जिले में मुस्लिमों की कयादत करते है। इस जिले का मुस्लिम कभी सांप्रदायिक नहीं रहा और वह हमेशा सेकुलर दलों के साथ मजबूती से खडा रहा लेकिन मुस्लिम नौजवानों को असद्दुदीन ओवैसी का कद निश्चित रूप से आकर्षित करता दिखा। सेकुलर दलों के लिए सहारनपुर में असद्दुदीन ओवैसी की बडी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आए है। 

सहारनपुर जिले में मुसलमानों पर पकड रखने वाले अकेले नेता इमरान मसूद है। जिनके चाचा दिवंगत रशीद मसूद आधा दर्जन से ज्यादा बार लोकसभा सदस्य रह चुके है। इमरान मसूद ही जिले में ऐसे नेता है जो असद्दुदीन ओवैसी को बेअसर करने की कुव्वत रखते है लेकिन आज भी ओवैसी की सफल जनसभा में मुस्लिम नौजवानों ने जिस कदर बढ-चढकर और जुनून के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई वह गैर भाजपाई दलो के लिए निश्चित ही सिरदर्द बढाने वाली रही। ओवैसी की जनसभा की खास बात यह थी कि आयोजकों में कोई भी नामवर या स्थापित नाम नहीं था। मुस्लिमों की भीड सिर्फ ओवैसी के नाम पर आई। यह अलग बात है कि वह वोट में तब्दील होती है या नहीं।