विश्व हिंदू परिषद के नेता सुरेन्द्र कुमार जैन के एक बयान से विवाद खड़ा हो गया है। सिलचर में हिंदू महा सम्मेलन के दौरान सुरेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि अगर मुसलमान भारत में रहना चाहते हैं तो उन्हें अपने धर्म के रूप में हिंदुत्व को स्वीकार करना होगा, अन्यथा विश्व हिंदू परिषद उन्हें देश से बाहर कर देगी। सुरेन्द्र कुमार जैन विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त सचिव हैं। सिलचर के दो दिवसीय दौरे के दौरान जैन ने कहा, भारत में रह रहे मुसलमान भारतीय संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं और उन्हें देश से बाहर धकेल दिया जाना चाहिए। 

इन मुसलमानों को भारत में रहने की सिर्फ एक तरीके से अनुमति मिल सकती है और वो है हिंदुत्व को स्वीकार करना। जैन ने कहा कि केवल हिंदू बनने से काम नहीं चलेगा, मुसलमानों को वंदे मातरम गाना होगा और गाय को अपनी मां के रूप में स्वीकार करना होगा। बकौल जैन, अब वक्त आ गया है कि मुसलमान अपने पूर्वजों की गलतियों को सही करें और हिंदुत्व को स्वीकार करें। उन्हें हिंदू संतों से माफी मांगनी चाहिए। मुसलमानों को यह स्वीकार करना चाहिए कि उनकी जड़ें मक्का में नहीं बल्कि श्री राम में हैं। 

जैन ने कहा कि अगर मुसलमान हिंदुत्व को स्वीकार नहीं करते हैं तो उन्हें देश के बाहर धकेल दिया जाएगा। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो विश्व हिंदू परिषद मुसलमानों को देश से बाहर कर देगी। एनआरसी पर जैन ने कहा कि एनआरसी के प्रकाशन के बाद कोई हिंदू भारत से बाहर नहीं भेजा जाएगा। अगर मुसलमान हिंदुत्व स्वीकार नहीं करते हैं तो उन्हें देश के बाहर भेज देना चाहिए। जिन मुसलमानों के दो से ज्यादा बच्चे हैं, उनसे वे सभी सरकारी सुविधाएं वापस ले लेनी चाहिए जो वे प्राप्त कर रहे हैं। 

बकौल जैन, अब वक्त आ गया है कि मुसलमान अपने पूर्वजों की गलतियों को सही करें और हिंदुत्व को स्वीकार करें। उन्हें हिंदू संतों से माफी मांगनी चाहिए। मुसलमानों को यह स्वीकार करना चाहिए कि उनकी जड़ें मक्का में नहीं बल्कि श्री राम में हैं। जैन ने कहा कि अगर मुसलमान हिंदुत्व को स्वीकार नहीं करते हैं तो उन्हें देश के बाहर धकेल दिया जाएगा। 

अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो विश्व हिंदू परिषद मुसलमानों को देश से बाहर कर देगी। एनआरसी पर जैन ने कहा कि एनआरसी के प्रकाशन के बाद कोई हिंदू भारत से बाहर नहीं भेजा जाएगा। अगर मुसलमान हिंदुत्व स्वीकार नहीं करते हैं तो उन्हें देश के बाहर भेज देना चाहिए। जिन मुसलमानों के दो से ज्यादा बच्चे हैं, उनसे वे सभी सरकारी सुविधाएं वापस ले लेनी चाहिए जो वे प्राप्त कर रहे हैं।