मुस्लिम महिलाओं ने हिजाब को लेकर पाबंदियों के खिलाफ बिगुल बजा दिया है और सड़कों पर उतर आई हैं। हिजाब न पहनने को लेकर गिरफ्तार एक महिला की मौत होने के बाद से ईरान में गुस्से और तनाव का माहौल है। यह पर जगहों पर महिलाओं ने विरोध में हिजाब जला दिए हैं और अपने बाल तक काट लिए हैं। हाल ही में महसा अमीनी नाम की 22 वर्षीय महिला की अस्पताल में तीन दिनों तक कोमा में रहने के बाद मौत हो गई थी। उसकी पुलिस की हिरासत में तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद अस्पताल में एडमिट कराया गया था। इसी को लेकर अब विरोध प्रदर्शन तेज हैं तथा सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। 

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विश्वविद्यालयों में आंदोलन हो रहे

इसको लेकर ईरान में कई विश्वविद्यालयों में आंदोलन हो रहे हैं। फारस और तनशीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहाद में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ISNA न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने सेंट्रल तेहरान में प्रदर्शन किए हैं। एजेंसी के मुताबिक सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और अपने हिजाब उतार डाले। प्रदर्शन तेज होने के बाद पुलिस ने कई जगहों पर लाठीचार्ज किया है और आंसूगैस के गोले भी दागे हैं। यही नहीं कई जगहों पर तो महिलाओं ने इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद के नारे भी लगाए हैं। 

महिलाओं पर हैं कड़ी पाबंदियां

तेहरान के साथ ही मशहाद में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। मृतक महिला कुर्दिस्तान प्रांत की रहने वाली हैं, जहां विरोध तेज है। फिलहाल पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है ताकि आंदोलन को कुचला जा सके।  ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों या घर से बाहर निकलने पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। इसके अलावा चुस्त कपड़ों और जीन्स पहनने पर भी पाबंदी है। इतना ही नहीं बल्कि ज्यादा चमक-धमक वाले कपड़ों पर भी ईरान में पाबन्दी है। इसको लेकर महिलाओं का एक वर्ग विरोध जाता रहा है, जिसे महिला की मौत ने और हवा दे दी है।

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महिला ने किया ड्रेस कोड का उल्लंघन

तेहरान के पुलिस चीफ जनरल हुसैन रहीमी ने कहा कि महिला ने ड्रेस कोड का उल्लंघन किया था। जिस वजह से पुलिस ने उसे पकड़ा था और उसके परिजनों से कहा था कि वे उसके लिए 'सही' कपड़े लेकर आएं। इसके साथ ही रहीमी ने कहा कि महिला के साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई थी। छात्रों ने महिला की मौत के खिलाफ प्रदर्शन किया है और जवाब मांगा है कि आखिर यह घटना कैसे हो गई। शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में विरोध तेज है।