नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) के विरोध में शुक्रवार को पंजाब के जालंधर जिले के कई मुस्लिम संगठनों ने जिला उपायुक्त के कार्यालय समक्ष विरोध प्रदर्शन किया तथा उपायुक्त को मांग पत्र सौंप कर इस नये कानून को रद्द करने की मांग की।

मस्जिद-ए-कुवा खांबड़ा के प्रधान मजहर आलम के नेतृत्व में पंजाब कांग्रेस प्रवासी प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष जब्बार खान, पंजाब कांग्रेस श्रमिक प्रकोष्ठ के महासचिव अमजद अली खान, आल पंजाब जमात-ए-सलमानी बरादरी के पंजाब प्रधान आविद हसन सलमानी, मदनी मस्जिद नकोदर के प्रधान अब्दुल सत्तार ठेकेदार ने जिला उपायुक्त को मांग पत्र सौंप कर कहा कि सीएए संविधान की मूलधारा के विपरीत भेद-भाव पैदा करके देश को विभाजन की ओर ले जाने वाला है।

उन्होंने कहा कि यह कानून मौलिक अधिकारों के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 15 का उल्लंघन करता है। मुस्लिम नेताओं ने कहा कि मुस्लिम देश में अमन और शांति से रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हिन्दु शरणार्थियों को देश में आने का अवसर दे रहे हैं उसी प्रकार जो मुस्लिम दूसरे देशों से भारत में आकर बसना चाहते हैं उनको भी यह अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को स्वतंत्र कराने में मुसलमानों की भागीदारी दूसरे धर्मों से कहीं ज्यादा है।

सीएए द्वारा मुसलमानों को हाशिए पर खड़ा करना खुली साजिश है, जिसकी वह घोर निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि देश में विशेष तौर पर मुसलमानों में एक प्रकार का एनआरसी का भय पैदा हो गया है। उन्होंने मांग की है कि एनआरसी और सीएए को रद्द किया जाए।