सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या विवाद में मुकदमा हार जाने के बाद मुस्लिम पक्ष ने बाबरी मस्जिद के मलबे और नींव पर अपना दावा करने का फैसला किया है। करीब 70 साल तक चले अदालती विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को हिंदुओं का बताया था। हालांकि हिंदू पक्ष ने भी मुस्लिमों की इस मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। बता दें कि बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर को ढहा दिया गया था। 

रामलला विराजमान के सखा (पक्षकार) त्रिलोकी नाथ पांडे ने कहा, 'वे मलबे को ले जा सकते हैं, क्‍योंकि यह उनका है। हमें कोई आपत्ति नहीं है। यह भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक होगा।' ऑल इंडिया मिल्‍ली काउंसिल के महासचिव खालिक अहमद खान ने कहा, 'हम बाबरी मस्जिद के मलबे और नींव पर अपना दावा करेंगे क्‍योंकि ढांचा मुस्लिमों का है।' 

खान ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने स्‍वीकार किया है कि मुस्लिमों ने मस्जिद के अंदर 300 साल से ज्‍यादा समय तक नमाज अदा की थी।' यह पूछे जाने पर कि क्‍या वे मलबे को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाने वाली 5 एकड़ जमीन पर ले जाएंगे तो मुस्लिम पक्ष ने कहा कि बाबरी मस्जिद के बदले हम कोई जमीन सरकार से नहीं लेंगे। जमीन के इंतजाम का मुद्दा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। 

गौरतलब है कि अयोध्या के 70 साल पुराने केस पर बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का फैसला दिया है। कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को दूसरी जगह पर 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि दिए जाने आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने राम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर एक ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया है।

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