उच्चतम न्यायालय ने बहुजन समाज पार्टी के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशां अंसारी की याचिका की सुनवाई शुक्रवार को दो सप्ताह के लिए टाल दी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की खंडपीठ को बताया गया कि चूंकि राज्य के सरकारी वकीलों को बदला गया है, इसलिए इस संबंध में सुनवाई टालने का उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आग्रह किया गया है।

मामले की सुनवाई दो सप्ताह टालने का अनुरोध किये जाने के बाद न्यायालय ने इस पर सहमति जता दी। अफशां अंसारी ने अपनी याचिका में सरकारी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश देने की मांग की है कि उनके पति का जीवन सुरक्षित रहे और उत्तर प्रदेश में सभी मामलों की सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके अधिकारों की रक्षा की जाये। 

गौरतलब है कि गत 26 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने मुख्तार अंसारी को पंजाब जेल से उत्तर प्रदेश की जेल में ले जाने का निर्देश दिया था। वह एक कथित जबरन वसूली मामले में जनवरी 2019 से पंजाब की जेल में बंद थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश में शारीरिक रूप से मुकदमे में शामिल होने के दौरान उनके पति का जीवन लगातार खतरे में रहने की आशंका है, ऐसे में सबसे अधिक जरूरी यह है कि जब मुख्तार अंसारी को एक जेल से दूसरे जेल में स्थानांतरित किया जाये या उत्तर प्रदेश में अदालत के सामने पेश किया जाये, तो पूरी कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जैसे केंद्रीय बलों की मौजूदगी में वीडियोग्राफी की जानी चाहिए।