देश में धर्मांतरण का मुद्दा गरमाया हुआ है।  इस बीच केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्मांतरण कर सकता है।  उन्होंने कहा कि इस देश में हर चीज की आजादी है।  

मंगलवार को नकवी ईसाई संगठनों से राजधानी दिल्ली में मुलाकात कर रहे थे।  इस दौरान समुदाय की तरफ से सरकार को शिक्षा नीति और धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर दो मेमोरेंडम सौंपे गए हैं। 

नकवी ने कहा कि जिसने वोट दिया और जिसने वोट नहीं दिया सबके लिए काम करेंगे।  आज हम सबके विकास और सेफ्टी के लिए काम कर रहे हैं।  उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर मजहब के लोग रहते हैं, आस्तिक भी हैं और नास्तिक भी हैं।  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनेकता में एकता है, पुरानी संस्कृति है।  इसलिए इस देश में असहिष्णुता नहीं है। 

नकवी ने कहा कि पड़ोसी देश में देखिए क्या हो रहा है, हमारे देश में ऐसा नहीं होता और अगर कोई करता भी है तो समाज उसको स्वीकार नहीं करता है।  उन्होंने कहा कि बहुत बार ऐसी बात होती है जैसे धर्मांतरण।  

धर्मांतरण किसी देश के विकास का पैमाना नहीं हो सकता।  अगर इच्छा से कोई धर्मांतरण करना है तो करे।  कोई सिख बनेगा कोई कुछ और बनेगा. सबके लिए खुला है।  उन्होंने कहा कि हमारा देश वसुधैव कुटुम्बकम है। 

नकवी ने ईसाई संगठनों के काम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इंसानियत ही सेवा है।  कोरोना में आपकी कई संस्थाएं हैं, जिन्होंने काम किया है।  आपके इस जज्बे को सलाम करता हूं।  सौंपे गए मेमोरेंडम में ईसाई संगठनों का कहना है कि इस नीति के तहत कई ईसाई स्कूल और कॉलेज बंद हो सकते हैं, क्योंकि पुराने नियम और नई नीति में कई तरह के विरोधाभास हैं।  साथ ही संगठनों को धर्मांतरण के आरोप में परेशान किया जा रहा है।