17वीं लोकसभा में दिए अपने पहले भाषण में ही तृणमुल कांग्रेस नेता व करीमनगर लोकसभा सीट से सांसद महुआ मोइत्रा ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। एक के बाद एक मोइत्रा ने मोदी सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हो या तृणमूल कांग्रेस वो अपने मजबूत इरादे, तेज तर्रार, ओजस्वी भाषण और जिंदादिली के कारण हमेशा एक चर्चा का विषय रही हैं।


कौन हैं महुआ मोइत्रा
महुआ मोइत्रा कोलकाता के एक बंगाली परिवार में 5 मई 1975 को पैदा हुईं। 15 साल की उम्र में वह पढ़ाई के लिए ब्रिटेन चली गईं। उन्होंने उच्च शिक्षा की पढ़ाई माउंट होल्योक कॉलेज से की और जेपी मॉर्गन से इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। उन्होंने न्यूयॉर्क और लंदन में कुछ सालों तक नौकरी की और वाइस प्रेसिडेंट के पद तक भी पहुंची।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब महुआ मोइत्रा चर्चाओं में आई हैं। इसके पहले भी वो कई बार सुर्खियों में रही हैं। साल 2015 की बात करें तो महुआ उस समय विवादों में घिर गईं जब नेशनल चैनल पर हो रहे एक बहस में उन्होंने अपनी मध्यमा (बीच की ऊंगली) दिखाई। फिर 2017 में उन्होंने बीजेपी संसद बाबुल सुप्रियो के ख़िलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया और उन पर टीवी पर हो रहे एक बहस में ‘महुआ महुआ पीकर बेहोश है’ कहने का आरोप भी लगाया।वहीं पिछले साल महुआ मोइत्रा एनआरसी के ड्राफ्ट से बाहर कर दिए गए लोगों के परिवार वालों से मिलने असम गई थी लेकिन असम के सिलचर हवाई अड्डे पर सुरक्षा बलों के साथ कथित रूप से हाथापाई करने की वजह से वह सुर्खियों में रही थीं। फिलहाल वर्तमान में उन्होंने देश भर में घरों और दफ्तरों में बीजेपी सरकार की सोशल मीडिया की निगरानी और सर्वेलेंस के खिलाफ एक याचिका दायर कर रखी है जिस पर अभी सुनवाई होनी है।आइए अब बात करते हैं उस भाषण की जो उन्होंने संसद के बजट सत्र के दौरान दी और जिसकी वाह वाही सांसद से लेकर सड़क तक हो रही है। वो कहती हैं....हमारा संविधान आज खतरे में है। आप मुझसे असहमत हो सकते हैं। आप कह सकते हैं कि अच्छे दिन आ गए हैं और ये सरकार जो जिस भारत का निर्माण करना चाहती है उसका सूरज कभी नहीं डूबेगा, लेकिन कुछ संकेतों को आप मिस कर रहे हैं और आप अपनी आंखें खुली रखेंगे तो ही इन्हें देख पाएंगे, आप देख पाएंगे कि ये संकेत हर जगह हैं इस देश को बाटां जा रहा है। इसके बाद उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिस राष्ट्रवाद की हवा चल रही है वो सतही, डरावनी और संकीर्ण है। इस राष्ट्रवाद में देश को बाटनें की भूख नजर आती है, इसे जोड़ कर रखने की इच्छा नहीं।
बीता चुनाव बेरोजगारी और किसानों की समस्या पर नहीं वाॅट्सऐप पर लड़ा गया, लोगों को मैनिपुलेट करके लड़ा गया। ये सरकार अपने हर झूठ को इतनी बार रिपीट करती है कि लोगों को सच लगने लगता है। मैं ये कहना चाहूंगी कि संसद में अपने हर झूठ के साथ आप भारत के सामाजिक तानेबाने को नष्ट कर रहे हैं।