बार्डर आैर  LOC जैसी देशभक्ति फिल्में दे चुके जे पी दत्ता ने इस बार पलटन के जरिए  1967 के भारत आैर चीन वाॅर को दिखाने की कोशिश की है। जो सिक्किम के नाथु ला पास पर हुई एक छोटी सी झड़प से शुरू हुई थी लेकिन यही झड़प बड़ी बन गई। इस साल भारतीय सेना सिक्किम को बचाने के लिए चीनी सेना से भिड़ जाती है। इस बार दत्ता ने यंग और अनुभवी दोनों तरह के कलाकारों को अपनी फिल्म में लिया है जो ऐसे रियल हीरोज का किरदार निभा रहे हैं हैं जिन्हें इतिहास में लगभग भुला दिया गया। 


अर्जुन रामपाल ने लेफ्टिनेंट कर्नल राय सिंह और सोनू सूद ने मेजर बिशन सिंह के किरदारों को अच्छी तरह से जिया है। इनके अलावा हर्षवर्धन राणे और गुरमीत चौधरी जैसे यंग एक्टर्स ने भी अच्छी परफॉर्मेंस दी है। लव सिन्हा भी अतर सिंह के किरदार में अच्छे लगे हैं जबकि सिद्धांत कपूर के पास करने के लिए कुछ खास नहीं था। फिल्म में चीनी आर्मी के जवानों का किरदार करने वालों ने अच्छी एक्टिंग नहीं की है। खासतौर पर कुछ-कुछ समय में उनके द्वारा 'हिंदी-चीनी भाई भाई' का नारा लगाया जाना और हिंदी में डायलॉग बोलना अजीब सा लगता है।


फिल्म की शूटिंग रियल लोकेशन पर हुई है और सेना के हथियारों और यूनिफॉर्म को देखकर ऐसा लगता है कि यह 1967 के समय की कहानी है। जेपी दत्ता ने ही इस फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले लिखा है जो अच्छा है लेकिन जबरन ठूंसी गई आधी-अधूरी बैकस्टोरीज फिल्म को लंबा और बोझिल बनाती हैं। फिल्म बहुत ज्यादा इमोशनल नहीं लगती है लेकिन ओवरऑल फिल्म आपको बोर नहीं करेगी। फिल्म में अच्छा ऐक्शन दिखाया गया है और फिल्म के अंत में जेपी दत्ता अपने सभी मसालों के साथ भारतीय सेना की जीत दिखाने में कामयाब होते हैं।


सत्य घटना पर आधारित है फिल्म
फिल्म 'पलटन' एक सत्य घटना पर आधारित है। यह घटना भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल पर स्थित नाथु ला दर्रे की है। यह भारत और तिब्बत के बीच जाने का एक अहम रणनीतिक रास्ता है। फिल्म दिखाती है कि किस तरह भारत 1962 में चीन से हारता है आैर पाच साल बाद भारतीय सेना चीन से अपने हार का बदला 1967 में लेती हैं।

1967 में भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट ने अदम्य साहस दिखाते हुए चीनी सेना को धूल चटा दी थी। यह घटना भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के केवल पांच साल बाद हुई थी और चीन को ऐसा अंदाजा नहीं था कि उसे भारतीय सेना से ऐसा करारा जवाब मिल सकता है।