कहते हैं अपने बच्चों को बचाने के लिए मां यमराज से भी लड़ सकती है। लेकिन युद्धग्रस्त यूक्रेन से अपने बेटे को वापस लाने में एक मां बेबस हो गई है। जिस मां ने कोरोना वायरस महामारी के चलते 2020 में लगाये गये लॉकडाउन में इस मां ने स्कूटर से करीब 1,400 किमी की दूरी तय कर बेटे को वापस घर लायी थी। वह अब युद्ध प्रभावित यूक्रेन से अपने बेटे को सुरक्षित घर लाने में बेबस है। इस महिला का बेटा कई भारतीय छात्रों के साथ यूक्रेन में फंसा है। अपने 19 वर्षीय बेटे के फंसे होने की वजह से यह महिला चिंतित है। तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका रजिया बेगम अपने बेटे निजामुद्दीन अमन की सुरक्षित वापसी के लिए दुआ मांग रही है। उनका बेटा यूक्रेन के सुमी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है।

यह भी पढ़ें- रूस यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन की बेटी के पीछे पड़ी दुनिया, खू​बसूरती देख दीवाने हुए लोग

बता दें कि सुमी, रूसी सीमा के पास स्थित है और ज्यादातर भारतीय छात्र सुमी स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध हैं। रजिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री के। चंद्रशेखर राव, राज्य के गृहमंत्री मोहम्मद महमूद अली से रूस और यूक्रेन के साथ तनावपूर्ण गतिरोध के बीच अपने बेटे और अन्य भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अमन बंकर में रह रहा है और उनसे फोन पर संपर्क कर रहा है।

यह भी पढ़ें- ये हैं रूस के चार जिगरी दोस्त देश, हर समय कुछ भी करने को रहते हैं तैयार

रजिया ने कहा, ‘उसने मुझे यह आश्वस्त करने के लिए कॉल किया कि वह ठीक है और मुझे उसके बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है।’ बताया जाता है कि उनका बेटा जिस स्थान पर है, वहां तक परिवहन संपर्क कटा हुआ है। उल्लेखनीय है कि दो साल पहले, कोविड-19 के प्रसार की रोकथाम के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाये जाने के बाद रजिया बेगम ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश स्थित नेल्लोर जिले में फंसे अपेन बेटे को वापस लाने के लिए 1,400 किमी की लंबी यात्रा की थी। स्थानीय पुलिस की अनुमति लेकर वह अकेले ही नेल्लोर गई थी और अपने बेटे को लेकर लौटी थी।