शनिवार को एनजेपी से सात किलोमीटर रंगापानी के निकट गुवाहाटी-सियालदह कंचनजंघा एक्सप्रेस से एक तीन साल की बच्ची को चलती ट्रेन से गिरते देख उसे बचाने के लिए मां ने भी ट्रेन से छलांग लगा दी। हालांकि इस घटना में बच्ची को खरोंच तक नहीं आई जबकि मां गंभीर रूप से घायल हो गर्इ। सिलीगुड़ी के सेवक रोड स्थिति एक नर्सिग होम में इनका इलाज चल रहा है।


जानकारी के मुताबिक दुर्गापुर निवासी अनिंदिता पाल अपने रिश्तेदारों के साथ पिछले शनिवार को एनजेपी से दुर्गापुर के लिए गुवाहाटी-सियालदह कंचनजंघा एक्सप्रेस में चढ़ीं। ट्रेन रंगापानी के पहुंचने वाली थी, उस दौरान वे ट्रेन के बाथरूम में गई तो पीछे-पीछे उनकी तीन साल की बच्ची भी चली गई। वे जैसे ही बाथरूम से बाहर निकलीं, ट्रेन के गेट से बच्ची को नीचे गिरते हुए देखा तो उन्होंने भी चलती ट्रेन से छलांग लगा दी।

जब मां ने छलांग लगार्इ तो उस दौरान ट्रेन सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। महिला को छलांग लगाते देख अन्य यात्रियों व  उसके रिस्तेदारों ने जंजीर खींच कर ट्रेन को रोकने की कोशिश की। इसकी जानकारी एनजेपी कंट्रोल रूम को दी। जंजीर खींचने की वजह से ट्रेन रंगापानी स्टेशन पर रुक गई। वहां रेलवे कर्मचारियों के खोजबीन के बाद घायल अवस्था में महिला मिली।

कुछ ही दूरी पर एक मंदिर के पास बच्ची भी रोती हुई मिली। रंगापानी स्टेशन के जूनियर इंजीनियर ने सुरेश भगत ने बताया कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारियों को मां व बच्ची के बारे में पता लगाने के लिए ट्रैक के निरीक्षण में भेजा गया। स्टेशन से कुछ ही दूरी पर बच्ची की मां गंभीर रूप से घायल अवस्था मिल गई। उसके सिर समेत शरीर के अन्य अंगों में गंभीर चोटें आई थीं। उसे वहां से स्टेशन लाकर इलाज के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल भेज दिया गया। अन्य कर्मचारियों ने बच्ची की खोज में आगे निकले। अंधेरे में लाइट जलाकर खोजते हुए आगे बढ़े तो एक मंदिर के पास बच्ची की रोने की आवाज सुनकर गए तो वहां वह मिली। इसके बाद ग्रामीण भी वहां आ गए। उसे भी वहां से उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल भेजा गया।

उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के आधिकारिक सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ थी। जबकि मां की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। यहां पर उसका आपातकालीन विभाग में जरूरी इलाज व ऑपरेशन किया गया। इसके बाद मरीज के परिवार को लोग अपने रिस्क पर शहर के एक नर्सिग होम में लेकर चले गए।