पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ सहित विभिन्न मौसमी तंत्र के आपस में मिलने से शुक्रवार को मेरठ में चेरापूंजी से ज्यादा बारिश हुई। इस भीषण बारिश से पूरा मेरठ टापू में तब्दील हो गया। महज 24 घंटे के अंदर ही मेरठ में देश की सर्वाधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है। जो 109 साल पहले की भीषण बारिश के लगभग बराबर है। 24 घंटे बाद भी मेरठ के कई हिस्से भीषण बारिश के कहर से उबर नहीं सके। बिजली, पानी सहितमूलभूत जरूरतों के लिए शहर के कई हिस्सों में दिक्कत बनी हुई है।



शुक्रवार सुबह 8.30 बजे से शनिवार सुबह 8.30 बजे तक हुई मेरठ में कुल 226.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार पूरे देशभर में मेरठ सर्वाधिक बारिश के साथ पहले पायदान पर है। मेरठ के बाद चेरापूंजी में 153 मिमी बारिश हुई। यानी सर्वाधिक बारिश के चर्चित चेरापूंजी से ज्यादा बारिश मेरठ में हुई। पिछले एक दशक में मेरठ में ऐसी बारिश नहीं हुई। 20 जुलाई 1909 के बाद यह दूसरी बार है जब मेरठ में मात्र 24 घंटे में इतनी बारिश हुई। 1909 में मात्र 24 घंटे में 227.1 मिमी बारिश हुई थी जबकि शुक्रवार-शनिवार की 24 घंटे की इसी अवधि में मेरठ में 226.2 मिमी बारिश हुई। यानी 109 साल के रिकॉर्ड से मात्र 0.9 मिमी कम बारिश से मेरठ को गुजरना पड़ा। साथ ही 1942 के बाद जुलाई अभी तक मेरठ में अधिकतम बारिश महीना भी बना हुआ है।