प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और पर्यटन के क्षेत्र में निवेश के लिए तुर्की की कंपनियों को आमंत्रित करते हुए सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार क्षमता से काफी कम है तथा इसे और बढ़ाने की जरूरत है। 

वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते और डॉलर के बदले अपनी मुद्रा में व्यापार की वकालत की। 

एर्दोगन के साथ भारत-तुर्की कारोबार समिट को संबोधित करते हुए मोदी ने यहां कहा कि भारत ने 2022 तक पांच लाख मकानों के निर्माण का लक्ष्य रखा है। पचास शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाएं और कई राष्ट्रीय गलियारों में हाई स्पीड ट्रेनें शुरू की जा रही हैं। 

अगले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ा कर 175 गीगावाट करने का लक्ष्य है। रेलवे नेटवर्क का आधुनिकीकरण तथा राजमार्गों का उन्नयन किया जा रहा है। इसी तरह हवाई अड्डों के उन्नयन पर भी फोकस है। 

उल्लेखनीय है कि तुर्की की कंपनियां निर्माण क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। पिछले तीन साल के दौरान अपनी सरकार द्वारा देश में कारोबार के अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में उठाये गये कदमों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कभी भी निवेश का माहौल इतना अच्छा नहीं रहा है जितना आज है। सरकार ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीतियों में बदलाव किए हैं। 

मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में वर्ष 2008 में एर्दोगन की भारत यात्रा के समय दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 2.8 अरब डॉलर था जो 2016 तक बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इसमें तेज बढ़ोतरी हुई है लेकिन यह काफी नहीं है। समिट में भारत की ओर से उद्योग संगठन फिक्की, सीआईआई और एसोचैम तथा तुर्की की ओर से उसके विदेश आर्थिक संबंध बोर्ड (डीईआईके) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

दो दिवसीय यात्रा पर भारत पधारे एर्दोगन के साथ बोर्ड के नेतृत्व में आए प्रतिनिधि मंडल में 153 उद्योगपति शामिल हैं।