नीति आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है कि अनूसूचित जातियों और जनजातियों के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं (SCSP और TSP) का 40 फीसदी हिस्सा उन्हें डायरेक्ट कंडिशनल कैश ट्रांसफर के जरिये दिया जाए।  आयोग का सुझाव है कि जिन परिवारों की आय 5,000 रुपये महीने से कम है, उनके लिए इसे लागू किया जाए।  साथ ही बाकी का 60 फीसदी हिस्सा उन जिलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर दिया जाए, जहां अनूसूचित जातियों और जनजातियों की बड़ी संख्या है। 

आपको बता दें कि नीति आयोग की ओर से ऐसी अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. वहीं अब तक भारत सरकार ने भी ऐसे किसी प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी है। 

1970 के दशक के बाद से केंद्र सरकार ने SCSP और TSP के तहत SC और ST समुदायों के विकास के लिए कुल आबादी में उनके हिस्से के अनुपात में धनराशि निर्धारित की है।  इसका मतलब है कि योजना निधि के 2011 की जनगणना के अनुसार 16.6% (जनसंख्या में एससी का हिस्सा) SCSP और 8.6% (जनसंख्या में एसटी का हिस्सा) TSP के रूप में खर्च किया जाना था।  हालांकि 2017-18 में बजट की योजना और उप-योजना घटकों को मिला दिया गया था, फिर भी मंत्रालयों के लिए कुछ फीसदी खर्च करना आवश्यक है।  आबादी में एससी (8.3%) और एसटी (4.3%) की हिस्सेदारी का कम से कम आधा हिस्सा, केंद्रीय क्षेत्र पर उनके खर्च और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण पर केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर किया जाना चाहिए।  SCSP और TSP के लिए कुल बजट 83,257 करोड़ रुपये और 2020-21 के बजट में 53,653 करोड़ रुपये था। 

पिछले पांच वर्षों में, SCSP और TSP के तहत कुल खर्च बजट के आकार में 2.8% से 4.5% तक बढ़ गया है।  हालांकि 2019-20 और 2020-21 के आंकड़े रिवाइज हो कर कम हो सकते हैं।  साल 2020-21 में इन योजनाओं के तहत धन आवंटित करने वाले 33 में से सिर्फ आठ मंत्रालय कुल खर्च का 80% हिस्सा थे. इसमें शिक्षा मंत्रालय , ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, और कृषि और किसान कल्याण शामिल है।