कोरोना महामारी की वजह से ज्यादातर राज्यों में दोबारा लॉकडाउन लगा हुआ है।  जिस वजह से जनता का बुरा हाल है।  इस वक्त में सबसे ज्यादा खराब स्थिति तो गरीब वर्ग और उनके बच्चों की है।  

इसको देखते हुए भारत सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया, जिसमे मिड-डे-मील योजना के तहत सभी पात्र बच्चों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।  इस योजना को केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंजूरी दे दी है।  सरकार को उम्मीद है कि इससे 11.8 करोड़ बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। 

केंद्र सरकार के मुताबिक ये योजना मिड-डे-मील को बढ़ावा देगी।  इसके साथ ही केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 1200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रदान करना है। केंद्र सरकार के इस एकमुश्त विशेष कल्याण उपाय से देशभर के 11.20 लाख सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक में पढऩे वाले लगभग 11.8 करोड़ बच्चों को लाभ होगा। 

वहीं दूसरी ओर भारत सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएम-जीकेएवाई) के तहत लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न (-5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति/माह) की घोषणा की थी, ऐसे में शुक्रवार को हुई घोषणा उससे अलग है।  

शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत सरकार छात्रों को लेकर चिंतित है।  इस वजह से तुरंत इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।  ये निर्णय बच्चों के पोषण स्तर को सुरक्षित रखने और चुनौतीपूर्ण महामारी के समय में उनकी प्रतिरक्षा की रक्षा करने में मदद करेगा।