महीनों से चल रहे किसान आंदोलन का समाधान केंद्र सरकार ने अभी तक नहीं किया है। 3 कृषि कानून के खिलाफ किसान दिल्ली हाइवे रोड़ पर महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। किसी तरह की कोई कार्रवाही नहीं किए जाने पर अब NHRC ने केंद्र, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सरकारों और अन्य प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग की है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली के मुख्य सचिवों, यूपी, हरियाणा, राजस्थान के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस आयुक्त, दिल्ली को नोटिस जारी कर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने को कहा है। NHRC ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय और भारत सरकार को विभिन्न पहलुओं पर किसानों के आंदोलन के प्रतिकूल प्रभाव और विरोध स्थलों पर कोविड प्रोटोकॉल के पालन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


इन्होंने कहा है कि “आयोग को चल रहे किसानों के विरोध के बारे में कई शिकायतें मिली हैं। एनएचआरसी ने केंद्र और राज्यों को अपने नोटिस में कहा कि 9000 से अधिक सूक्ष्म, मध्यम और बड़ी कंपनियों को गंभीरता से प्रभावित करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव के आरोप हैं "।

नोटिस में कहा गया है, "कथित तौर पर, परिवहन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे यात्रियों, मरीजों, शारीरिक रूप से विकलांग लोगों और वरिष्ठ नागरिकों को सड़कों पर भारी भीड़ के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है।"  NHRC ने आदेश में आगे कहा कि "ऐसी भी खबरें हैं कि किसान आंदोलन के कारण लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी की यात्रा नहीं कर सके और सीमाओं पर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं।"


इसके अलावा, NHRC ने आर्थिक विकास संस्थान (IEG) को औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों / उत्पादन पर किसानों के आंदोलन के प्रतिकूल प्रभाव और वाणिज्यिक और सामान्य उपभोक्ताओं पर परिवहन सेवाओं में व्यवधान सहित असुविधा और अतिरिक्त व्यय, आदि की जांच करने के लिए कहा है। NHRC ने आईईजी को 10 अक्टूबर, 2021 तक इस मामले पर एक व्यापक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।


इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विरोध स्थल पर मानवाधिकार कार्यकर्ता के कथित सामूहिक बलात्कार के मामले में एक नया अनुस्मारक जारी किया और 10 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा क्योंकि झज्जर के जिलाधिकारी से कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। आयोग ने कहा कि प्रदर्शन स्थलों पर आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।