पश्चिम बंगाल में नारदा स्टिंग केस को लेकर बवाल हो गया है।  ममता बनर्जी सरकार के दो मंत्रियों समेत तृणमूल कांग्रेस के चारों नेताओं को आधी रात के करीब जेल भेज दिया गया।  इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने सभी की जमानत रद्द कर दी थी।  

सभी नेताओं को सीबीआई ने कल छापेमारी के बाद गिरफ्तार कर लिया था।  सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद टीएमसी ने कहा है कि मोदी सरकार बंगाल में हार बर्दाश्त नहीं कर पा रही है, इसलिए बदले की कार्रवाई कर रही है। 

सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में टीएमसी के नेता फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा, पूर्व टीएमसी नेता और कोलकाता के पूर्व महापौर सोवन चटर्जी को जमानत दे दी थी, लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट ने जल्द ही निचली अदालत के आदेश के अमल पर रोक लगा दी। 

वहीं पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छह घंटे तक सीबीआई कार्यालय में धरने पर बैठी रही, जबकि उनके समर्थकों ने परिसर को घेरे रखा।  केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई के खिलाफ राज्य के कई स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुए। 

गौरतलब कि हाई कोर्ट ने 16 अप्रैल 2017 को स्टिंग ऑपरेशन की जांच सीबीआई को करने के निर्देश दिए थे।  बाद में एक विशेष अदालत ने तृणमूल कांग्रेस के नेता और राज्य के मंत्रियों फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी, पार्टी विधायक मदन मित्रा और पार्टी के पूर्व नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को जमानत दे दी।  सीबीआई ने चारों नेताओं और आईपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा के खिलाफ अपना आरोप-पत्र दाखिल किया था।  मिर्जा इस समय जमानत पर हैं।