भारत-चीन सीमा पर केन्द्र सरकार 44 सड़कें बनवाने की तैयारी में जुट गई है। इन सड़कों को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। सड़कों के निर्माण के पीछे मकसद यह है कि चीन से टकराव की स्थिति में सेना को बॉर्डर पर तुरंत जुटाने में आसानी हो। केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) द्वारा इस महीने जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट 2018-19 के मुताबिक एजेंसी को भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक तौर पर काफी अहम इन 44 सड़कों के निर्माण का निर्देश दिया गया है। इससे चीन से टकराव की स्थिति में बॉर्डर पर सेना को तुरंत भेजने में आसानी होगी। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा संबंधी मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति(सीसीएस)से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर मंजूरी लेने की प्रक्रिया चल रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत-चीन सीमा पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन 44 सड़कों का निर्माण करीब 21 हजार करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब चीन भारत के साथ लगने वाली उसकी सीमाओं पर परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है। पिछले साल डोकलाम में चीन के सड़क बनाने का कार्य शुरू करने के बाद दोनों देशों के सैनिकों में गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई थी।

बातचीत में आपसी सहमति बनने के बाद चीन ने उस इलाके में सड़क निर्माण रोक दिया, जिसके बाद भारतीय सेना लौट आई। 18 जून को शुरू हुआ गतिरोध 28 अगस्त को खत्म हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक सीपीडब्ल्यूडी को भारत चीन सीमा से लगते पांच राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम व अरुणाचल प्रदेश में 44 सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण का कार्य सौंपा गया। मालूम हो कि भारत व चीन के बीच करीब 4 हजार किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक के इलाकों से गुजरती है। 2017 में हुए डोकलाम गतिरोध के बाद इस साल की शुुरुआत में ही भारत सतर्क हो गया। भारत चीन से सटी लंबी सीमा के करीब कई रणनीति बिंदुओं पर सैन्य उपकरण पहुंचाने लगा है। भारत ने सड़क समेत बुनियादी सरंचना का विकास बड़े स्तर पर शुरू कर दिया है। चीन की सीमा के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से के करीब 31 हवाई क्षेत्रों का विकास किया गया है। इनमें असम के चाबुआ और तेजपुर के एयरपोर्ट सबसे अहम हैं। इसके अलावा भारत ने अरुणाचल के तवांग और दिरांग में दो एडवांस लैंडिंग ग्राउंड(एएलजी) का भी निर्माण किया है। 

संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक भारत चीन सीमा के करीब 73 सड़कों का निर्माण कर रहा है। इनमें से सड़क निर्माण की 30 परियोजनाएं पूरी हो चुकी है। बीते कुछ वर्षों के दौरान चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा(एलएसी) के करीब अपने बुनियादी ढांचे के विकास के कई कार्य पूरे किए हैं। चीन ने भारत की सीमा पर 15 प्रमुख हवाई अड्डे और 27 छोटी हवाई पट्टियों का निर्माण पूरा कर लिया है। इनमें हर तरह के मौसम में इस्तेमाल किया जाने वाला तिब्बत का गोंकर का एयरपोर्ट है, जहां एडवांस फाइटर प्लेन तैनात किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक चीन ने तिब्बत और युन्नान प्रांत में बड़े स्तर पर सड़कों और रेल नेटवर्क का जाल बिछा लिया है। चीन का दावा है कि चीनी सेना अब सिर्फ 48 घंटों में सीमा पर पहुंच सकती है। खबरें हैं कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास करीब 31 जगहों पर पक्की सड़कें बना ली है। 

भारत-चीन डोकलाम गतिरोध के बाद नियंत्रण व महालेखा परीक्षक(कैग) ने भारत चीन सीमा सड़क परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद बीआरओ को अधिक शक्तियां दी गई। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण का कार्य बीआरओ के जिम्मे होता है। भारत-चीन सीमा पर ऐसी 61 सड़कें बनाई जा रही है जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। बीआरओ को ज्यादा शक्तियां मिलने के बाद चीन सीमा पर सड़कों के निर्माण कार्यों में अब तेजी आएगी और ये सड़कें जल्द बनेगी।