असम गण परिषद फिर भाजपा से हाथ मिला सकती है। पार्टी अध्यक्ष तथा बोकाखत के विधायक अतुल बोरा ने इसके संकेत दिए हैं। बोरा ने कहा कि नागरिकता बिल को लेकर असम गण परिषद ने भाजपा में गठबंधन तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने भविष्य में गठबंधन की किसी संभावना से इनकार भी नहीं किया। बोरा ने कहा कि भाजपा से मतभेदों के कारण पार्टी गठबंधन से बाहर आई लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी से गठबंधन की संभावना से सुस्पष्ट रूप से इनकार भी नहीं किया।

मीडिया कर्मियों से बातचीत में बोरा ने कहा, देखिए हम लगातार बता रहे हैं कि असम गण परिषद नागरिकता बिल के खिलाफ है। हमने पहले ही दिन से इसका विरोध किया। बिल से पूर्वोत्तर में पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में केंद्र सरकार को आश्वस्त करने के लिए हमारी ओर से हर संभव कोशिश की। हालांकि जब हमें पता चला कि भाजपा बिल के साथ आग बढ़ रही है तो हमने गठबंधन से बाहर आने का फैसला लिया और इसकी घोषणा भी की। भविष्य पर बोरा ने कहा मैं आपको कैसे बता सकता हूं कि भविष्य में हम भाजपा से गठबंधन करने जा रहे हैं या नहीं? मैं आपको बता सकता हूं कि फिलहाल हम गठबंधन में नहीं है। अन्य मुद्दों पर हमें पार्टी फोरम पर चर्चा करनी पड़ेगी कि हमें गठबंधन करना है या नहीं, और लोकसभा चुनाव में हमें किस तरह से आगे बढ़ना है।

आपको बता दें कि नागरिकता बिल के कारण असम गण परिषद के भाजपा से मतभेद उतपन्न हो गए थे। मोदी सरकार नागरिकता कानून 1955 में संशोधन करने जा रही थी। बिल में पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में धार्मिक अत्याचार के कारण भारत औए गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता प्रदान किए जाने का प्रावधान है। 8 जनवरी को बिल लोकसभा में पारित भी हो गया था लेकिन राज्यसभा में बहुमत नहीं होने व विपक्ष के विरोध के चलते बिल भरी सदन में पेश नहीं किया जा सका। बिल पारित नहीं होने से असम सहित पूर्वोत्तर में जश्न का माहौल है।