नई दिल्ली। मोबाइल फोन हमारी लाइफ में काफी आम हो चुका है जिसके तहत बात करने के अलावा कई सारे काम निपटा सकते हैं. आज के समय में फोन से सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं, बल्कि और भी बहुत जरूरी काम होने लगे हैं. हालांकि, जितना जरूरी फोन होता है, उतना ही इसका चार्जर भी जरूरी है. हम जब भी ज्यादा टाइम के लिए बाहर जाते हैं तो फोन के साथ-साथ उसका चार्जर भी लेकर चलते हैं. लेकिन कई लोगों को फोन को हर समय चार्ज पर लगाने की आदत होती है इस वजह से उनका चार्जर हमेशा बिजली के सॉकेट में ही लगा रहता है. लेकिन, क्या ऐसा करने पर भी चार्जर बिजली की खपत करता है और ऐसा करना उचित है या नहीं...

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सॉकेट में लगा चार्जर बिजली खाता है या नहीं

बहुत ही कम ही ऐसे होते हैं जो इस्तेमाल नहीं होने पर चार्जर को सॉकेट से निकलते हैं. क्योंकि ज्यादातर लोग र्चाजर को सॉकेट में ही लगा हुआ छोड़ देते हैं. आपको बता दें कि प्लग-इन किया गया कोई भी स्विच ऑन चार्जर बिजली का इस्तेमाल करता रहता है. भले ही चार्जर से डिवाइस कनेक्टेड हो या न हो. ऐसा करने से बिजली की मात्रा में केवल कुछ यूनिट खर्च होने के साथ ही चार्जर की लाइफ भी धीरे-धीरे कम होती है.

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फोन की बैटरी खराब होने से ऐसे बचाएं

आपको बता दें कि मोबाइल फोन को थोड़ी-थोड़ी देर में चार्ज करने से इसकी बैटरी की लाइफ पर भी असर पड़ता है. इसी वजह से फोन बैटरी के लिए 40-80 रूल को फॉलो करने के लिए कहा जाता है. ऑप्टिमाइज़ बैटरी लाइफ के लिए आपके फोन की बैटरी कभी भी 40 प्रतिशत से कम और 80% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा फोन को अलग-अलग चार्जर से चार्ज करना भी बैटरी के लिए अच्छा नहीं होता. हमेशा ओरिजिनल चार्जर से ही फोन को चार्ज करना चाहिए.