ज्ञानवापी मस्जिद मामले के साथ ही अब महाराष्ट्र में नया विवाद शुरू होता नजर आ रहा है। महाराष्ट्र नव निर्माण सेना ने पुणे शहर में मौजूद दो दरगाहों के मंदिर की जमीन पर बने होने का दावा किया है। हाल ही में मुंबई में औरंगजेब के मकबरे पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने स्मारक पर 5 दिनों के लिए बंद करने का फैसला किया था।

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इसको लेकर मनसे महासचिव अजय शिंदे ने कहा कि उन्होंने 'पुण्येश्वर मुक्ति' अभियान की शुरुआत की है और लोगों से राज ठाकरे की पार्टी का समर्थन करने की अपील की है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे के हवाले से शिंदे ने कहा कि राज ठाकरे के हिंदुत्व के रुख पर सरकार की नींद टूटने लगी है। उन्होंने कहा, 'ज्ञानवापी की तरह हम पुणे में पुण्येश्वर मंदिर के लिए भी लड़ रहे हैं।'

मनसे नेता का दावा है कि खिलजी वंश के कमांडर अलाउद्दीन खिलजी ने पुणे में पुण्येश्वर और नारायणेश्वर मंदिरों को ढहा दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिरों के ढहाने के बाद उनपर दरगाह का निर्माण किया गया।

कुछ दिनों पहले मनसे के प्रवक्ता गजानन काले ने ट्वीट के जरिए स्मारक पर सवाल उठाए थे और कहा था कि इसे तबाह कर देना चाहिए। इसके बाद औरंगाबाद में एक मस्जिद समिति ने मकबरे पर ताला लगाने की कोशिश की। बाद में ASI ने स्मारक पर अतिरिक्त गार्ड्स की तैनाती कर सुरक्षा बढ़ा दी थी।

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इसमें खास बात है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी मकबरे पर पहुंचे थे। उनके इस दौरे की महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन महाविकास अघाड़ी में शामिल शिवसेना ने कड़ी आलोचना की थी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने भी हैरानी जताई थी कि इस तरह के कामों से महाराष्ट्र में नया विवाद छेड़ने की कोशिश की जा रही है।