मिजोरम सरकार में मंत्री डॉ.बुद्धा धान चकमा ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। चार चकमा छात्रों को एमबीबीएस की सीटें नहीं देने के विरोध में चकमा ने इस्तीफा दिया है। चारों छात्रों ने इस साल आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट(एनईईटी) में क्वालिफाई किया था और  मिजोरम स्टेट कोटा के तहत बनी मेरिट लिस्ट के मुताबिक उन्होंने सीटें हासिल की थी।

मुख्यमंत्री ललथनहवला को सौंपे इस्तीफे में रेशम उत्पादन व मत्स्य पालन मंत्री बुद्धा धान चकमा ने कहा कि चार चकमा छात्रों को 20 जुलाई 2017 को मिजोरम सरकार के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने काउंसलिंग के लिए बुलाया था लेकिन उसी दिन कथित काउंसलिंग पूरी होने व कोई वजह बताए बिना उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के आयुक्त ने पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया को रद्द कर दिया। आयुक्त ने फिर से काउंसलिंग का आदेश दिया। बकौल चकमा,चारों चकमा छात्रों ने मिजोरम स्टेट कोटा के तहत नीट-2017 क्वालिफाई किया था। ये छात्र हैं दर्शन चकमा, निबिर चकमा, मिनी चकमा, निभिर तोंगचांग्या।

आपको बता दें कि मिजोरम की एनजीओ को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने बुद्धा धान चकमा के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन की धमकी दी थी। यंग मिजो एसोसिएशन(वाईएमए) के अध्यक्ष लालबियाकजुआला ने शनिवार को यह धमकी दी थी। उन्होंने बताया था कि 27 जुलाई को एनजीओ को-ऑर्डिनेशनल कमेटी ने मुख्यमंत्री ललथनहवला को ज्ञापन सौंपा था। इसमें चकमा को मंत्री पद से हटाने को कहा गया था। हाल ही में प्रमुख गैर सरकारी संगठनों की बैठक हुई थी। इसमें एनजीओ को-ऑर्डिनेशन कमेटी के ज्ञापन पर चर्चा हुई। मीटिंग में फैसला हुआ था कि अगर चकमा को 25 अगस्त तक मंत्री पद से नहीं हटाया जाता है तो आंदोलन किया जाएगा।

मीटिंग में यह भी फैसला हुआ था कि 26 अगस्त को एनजीओ क-ऑर्डिनेशनल कमेटी की बैठक होगी। इसमें भविष्य की कार्रवाई पर चर्चा की जाएगी। यंग मिजो एसोसिएशन एनजीओ को-ऑर्डिनेशन कमेटी का हिस्सा है। सिविल सोसायटीज चकमा स्वायत्त जिला परिषद(सीएडीसी) के उप चुनाव में चकमा की भूमिका को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे।